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दलित युवक से मारपीट के आरोपों पर एसपी कार्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन*

पांच दिन में जांच का आश्वासन, कार्रवाई नहीं हुई तो 9 मार्च से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी*

हनुमानगढ़। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हनुमानगढ़ पर गोलूवाला हंसलिया के ग्रामीणों ने दलित समाज के युवकों के साथ कथित पुलिस मारपीट एवं उत्पीड़न के विरोध में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि एवं जनप्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गोलूवाला थाना पुलिस द्वारा दलित समाज के अमरजीत बावरी के साथ चोरी के झूठे मुकदमे को लेकर बेरहमी से मारपीट की गई और गंभीर प्रताड़ना दी गई।
ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस की पिटाई से अमरजीत की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे पहले पीलीबंगा और फिर हनुमानगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आरोप यह भी लगाया गया कि अमरजीत को मारपीट के बाद छोड़ दिया गया। इसके अलावा दलित समाज के रामपाल नायक को धरना स्थल से उठाकर गोलूवाला थाने ले जाया गया, जहां उसके साथ कथित रूप से बुरी तरह मारपीट की गई और उल्टा लटकाया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने जातिसूचक गालियां भी दीं।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार रामपाल नायक ने कुछ दिन पूर्व एक पुलिसकर्मी के नशे की हालत में होने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसके बाद से उसे निशाना बनाया जा रहा था। इसी रंजिश के चलते उसके साथ मारपीट की गई। धरना स्थल पर सभा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।
धरने के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसपी कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी की। कुछ देर तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच समझाइश चलती रही, जिसके बाद जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर ने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता में एडिशनल एसपी अरविंद कड़वासरा, डीवाईएसपी मीनाक्षी सहारण सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदर्शनकारियों की ओर से कामरेड़ रामेश्वर वर्मा, पूर्व अध्यक्ष गंगाराम खटीक, अमर, जगदीश सारस्वत, एडवोकेट रघुवीर वर्मा, सरपंच प्रतिनिधि रफीक लोदी, रणवीर नायक, जसविंदर सिंह, मास्टर गोपाल बिश्नोई, अनिल चौधरी, रामपाल नायक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एसपी को वीडियो एवं फोटो साक्ष्य सौंपे। उनका आरोप था कि अमरजीत बावरी द्वारा ज्ञापन देने के अगले ही दिन सुबह करीब चार बजे गोलूवाला पुलिस उसके घर पहुंची और परिवार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए घर की तलाशी ली तथा महिलाओं के साथ गाली-गलौज की। एसपी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि दोनों प्रकरणों की जांच पांच दिन में पूरी कर ली जाएगी और यदि जांच में पुलिसकर्मियों की दोष सिद्ध होती है तो उनके विरुद्ध निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
सभा को संबोधित करते हुए कामरेड़ रामेश्वर वर्मा ने कहा कि जिले में अपराध बढ़ रहे हैं और पुलिस की कथित गुंडागर्दी से आमजन में भय का वातावरण बन रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप लेगा। मास्टर जसविंदर सिंह ने कहा कि ज्ञापन देने के बाद ही परिवादी परिवारों पर दबाव बनाने के लिए छापेमारी की जा रही है, जो चिंताजनक है। एडवोकेट रघुवीर वर्मा ने इसे दलितों पर पुलिसिया दमन करार देते हुए आर-पार की लड़ाई की बात कही।
अंत में प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 9 मार्च से जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, हनुमानगढ़ पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में विभिन्न समाजों एवं संगठनों के अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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