धर्म

भारत विकास परिषद ने किया कन्याओं का सामूहिक विवाह आयोजन

. सिख, हिंदू और मुस्लिम रीति-रिवाजों से बंधे 10 जोड़े, सामाजिक समरसता का दिया संदेश

हनुमानगढ़। भारत विकास परिषद हनुमानगढ़ संगम शाखा द्वारा रविवार को सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें 10 कन्याओं का विवाह विविध धर्मों की परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। इस अवसर पर सामाजिक समरसता, संस्कार और परोपकार की अनूठी मिसाल पेश की गई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक गणेश राज बंसल रहे। उनके साथ पंडित सुरेश लाल शर्मा, भामाशाह शिव शंकर खडगावत, एसकेडी विश्वविद्यालय के संस्थापक बाबूलाल जुनेजा, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक जनेश तंवर, डॉक्टर राजीव गोयल, धर्मपाल बंसल, देवेंद्र अग्रवाल, डॉक्टर प्रमोद चौधरी तथा परिषद के प्रांतीय महासचिव संजय जिंदल ने विशेष रूप से शिरकत की।
परिषद अध्यक्ष महेश जसूजा ने जानकारी दी कि संस्था का उद्देश्य 21 कन्याओं का सामूहिक विवाह करवाने का था, किंतु इस वर्ष 10 योग्य आवेदन मिलने पर 10 कन्याओं का ही विवाह करवाया गया। उन्होंने बताया कि इनमें से 6 जोड़ों का विवाह सिख धर्म के रीति-रिवाजों से, 2 जोड़ों का विवाह हिंदू परंपरा के अनुसार तथा 2 जोड़ों का विवाह मुस्लिम रीति-रिवाजों से कराया गया। इस अनूठी पहल ने समाज में सांप्रदायिक एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया।


समारोह के सफल आयोजन में अध्यक्ष महेश जसूजा, सचिव आशीष सक्सेना, कोषाध्यक्ष प्रदीप मित्तल के साथ अरुण अग्रवाल, सुरेंद्र गाड़ी, विकास जुनेजा, राजेंद्र कासनिया, अंजू बंसल, रिंकू पुरबा, महेंद्र भगत, अंकुर मुंजाल, सिंपल बंसल, प्रवीण गोयल, राजीव अग्रवाल, राज तिवाड़ी, कालूराम शर्मा, हरीश जैन, ललित भठेजा, डॉ. आदित्य चावला, डॉ. अनिल गोयल, डॉ. जतिन आसेरी और डॉ. राम सिहाग,माया, नताशा, रुखसार बानो, राहुल सहित अनेक समाजसेवियों का विशेष योगदान रहा। सचिव आशीष सक्सेना और कोषाध्यक्ष प्रदीप मित्तल ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।


इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि सामूहिक विवाह न केवल आर्थिक दृष्टि से समाज के लिए सहायक है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता, परंपराओं की रक्षा और विभिन्न धर्मों के बीच सामंजस्य का भी प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को संबल मिलता है, वहीं समाज में आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है।
कार्यक्रम में सभी वर-वधू को वरमाला पहनाई गई और उन्हें जीवन के नए सफर की शुभकामनाएं दी गईं। अतिथियों और समाज के वरिष्ठजनों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके जीवन को सुखमय और मंगलमय होने की कामना की। मंच से यह संदेश भी दिया गया कि समाज को ऐसे आयोजनों में आगे आकर सहयोग करना चाहिए ताकि कोई भी बेटी बिना विवाह के बोझिल न रहे।
समारोह का भावनात्मक माहौल
पूरे आयोजन में धार्मिक मंत्रोच्चार, कीर्तन और कुरान की आयतों के पाठ के बीच विवाह की रस्में पूरी हुईं। विविध धर्मों की परंपराओं के सम्मिलन ने समारोह को अद्वितीय और भावनात्मक बना दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सामाजिक न्याय और धार्मिक एकता का सशक्त उदाहरण हैं।

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