धर्म

सिरसा में ‘वीरांगना कन्या संस्कार केंद्र’ का शंखनाद: सावित्रीबाई फुले जयंती पर बेटियों को मिला शिक्षा और संस्कार का उपहार!

* ऐलनाबाद / सिरसा.04 जनवरी (रमेश भार्गव): राष्ट्र की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले जयंती के पावन अवसर पर सिरसा की पीर बस्ती में एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। श्रीमद् भागवत गीता शक्तिपीठ केंद्र (कुरुक्षेत्र) एवं अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच के तत्वाधान में चल रही भागवत कथा के विश्राम दिवस पर ‘वीरांगना कन्या संस्कार केंद्र’ का भव्य शुभारंभ किया गया।
समरसता महायज्ञ और कन्या पूजन से शुरुआत
कार्यक्रम का आरंभ गायत्री सामाजिक समरसता कामधेनु महायज्ञ की पवित्र आहुतियों के साथ हुआ। राष्ट्रीय योगाचार्य एवं भागवत आचार्या दीदी श्रीजी (उज्जैन) ने कन्या पूजन कर और कन्याओं को स्नेहपूर्वक भोजन करवाकर इस संस्कार केंद्र की नींव रखी।
* राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार:
तमिलनाडु से रामेश्वरम तक
संस्था ने इस अवसर पर अपनी सांगठनिक शक्ति को विस्तार देते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
नई नियुक्ति: श्रीमान अनिल जी लढ़ा को तमिलनाडु राज्य का प्रांत संयोजक नियुक्त किया गया।
गौ-सेवा संकल्प: श्री अंजनी जी द्वारा गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने हेतु देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ रामेश्वरम से किया जा रहा है।
आगामी अधिवेशन: घोषणा की गई कि संस्था का भव्य राष्ट्रीय अधिवेशन 19 से 26 नवंबर 2026 तक पावन नगरी रामेश्वरम में आयोजित होगा।
* संस्कार केंद्र का उद्देश्य:
आधुनिक शिक्षा + सनातन संस्कार
दीदी श्रीजी के मार्गदर्शन में वर्तमान में मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में 7 केंद्रों का सफल संचालन हो रहा है, जहाँ 320 कन्याओं को संस्कार युक्त आधुनिक शिक्षा पूर्णतः निःशुल्क दी जा रही है।
सिरसा केंद्र की जिम्मेदारी:
स्थानीय स्तर पर सुश्री सोनिया जी सोनी एवं सीमा जी ठाकुर को संस्कार केंद्र की शिक्षिका के रूप में नियुक्त किया गया है।
संतों और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक और सामाजिक जगत की कई विभूतियों ने शिरकत की:
स्वामी मुक्तानंद जी महाराज (राष्ट्रीय संयोजक, संत प्रकोष्ठ – अखंड आश्रम, शाजापुर, म.प्र.) ने अपने आशीर्वाद से कार्यक्रम को धन्य किया।
श्रीमती ममता जी गोयल (प्रांत संयोजक) की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा प्रदान की।
इस पहल का महत्व:
“सावित्रीबाई फुले के पदचिन्हों पर चलते हुए यह केंद्र बेटियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि धैर्य, संयम, विवेक और सनातन गौरव की शिक्षा भी देगा। यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।”
* मुख्य बिंदु:
प्रथम महिला शिक्षिका को श्रद्धांजलि: जयंती पर शिक्षा के केंद्र का उपहार।
निःशुल्क शिक्षा: गरीब व पिछड़ी बस्ती की बालिकाओं के लिए स्वर्णिम अवसर।
अखिल भारतीय मिशन: हरियाणा से लेकर तमिलनाडु तक सनातन धर्म का प्रचार।

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