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बाल श्रम उन्मूलन के लिए पैन इंडिया बचाव व पुर्नवास अभियान 2.0,

बचाव कार्य तेज बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में एक कदम अभियान के तहत आज गुरुवार को सीडब्ल्यूसी व श्रम विभाग द्वारा सयुंक्त अभियान शरू 31 मार्च तक चलेगा यह अभियान

हनुमानगढ़। राजस्थान सरकार के बाल अधिकारिता विभाग द्वारा चलाए जा रहे पैन इंडिया बचाव व पुर्नवास अभियान 2.0 के तहत बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस अभियान के तहत सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट जितेंद्र गोयल ,सदस्य सुमन सैनी,जिला श्रम अधिकारी देवेन्द्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने हनुमानगढ़ जिले के विभिन्न ईट भट्टों और होटलों का निरीक्षण किया। टीम ने इन स्थानों पर कार्यरत बाल श्रमिकों की स्थिति की जांच की और उनके अभिभावकों को कड़ी चेतावनी दी कि यदि बच्चों को श्रम में लगाना जारी रहा तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अभियान के तहत गोयल ने ईंट भट्टों पर मजदूर परिवारों व अन्य स्टॉफ के सदस्यों को जिला प्रशासन के मानस अभियान के तहत नशा न करने व आमजन को जागरूक करने की शपथ भी दिलाई गई।

मजिस्ट्रेट जितेन्द्र गोयल ने बताया कि बाल श्रम से जुड़े मामलों में सरकार की नीति सख्त है और इस अभियान का उद्देश्य बाल श्रमिकों को बचाकर उन्हें शिक्षा के मुख्यधारा में लाना है। निरीक्षण के दौरान कई बच्चों को श्रम करते हुए पाया गया, जिन्हें उनके अभिभावकों से अलग कर शिक्षा के अवसर प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के अभिभावकों को अंतिम नोटिस दिया गया है और उन्हें चेतावनी दी गई है कि वे बच्चों को स्कूल भेजें।

गोयल ने आगे बताया कि अभियान के तहत उन बच्चों के लिए ईंट भट्टों पर सामूहिक पाठशालाएं खोली जाएंगी, जिन्हें श्रमिक के रूप में काम करने की मजबूरी होती है। इन पाठशालाओं में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी ताकि वे साक्षर हो सकें और उनका भविष्य उज्जवल बन सके। इस तरह की पहल से बच्चों को न केवल शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे सामाजिक और मानसिक रूप से भी सशक्त होंगे।और मुख्यधारा से जुड़ेंगे

टीम ने जिन ईट भट्टों और होटलों का निरीक्षण किया, वहां बाल श्रमिकों की पहचान की और उनके माता-पिता से बातचीत की। साथ ही उन्हें समझाया गया कि बच्चों को काम करने के बजाय शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। इस अभियान का उद्देश्य बाल श्रम को समाप्त करना और बच्चों को उनका अधिकार, यानी शिक्षा दिलवाना है।

बाल अधिकारिता विभाग के इस अभियान को लेकर जिले में विभिन्न संगठन भी सक्रिय हैं, जो बाल श्रमिकों को पहचानने और उनके पुर्नवास के लिए काम कर रहे हैं। इन पाठशालाओं का उद्देश्य बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना है ताकि वे अपना जीवन बेहतर बना सकें और समाज में उनका स्थान सुनिश्चित हो सके।

इस अभियान के तहत बाल श्रम को समाप्त करने के लिए जिलेभर में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को बाल श्रम के खतरों और उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी मिल सके।

जिला श्रम अधिकारी देवेन्द्र कुमार ने बताया कि इस अभियान से हनुमानगढ़ जिले में बाल श्रम की समस्या में कमी आएगी और बच्चों को उनकी शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा। इस अभियान के सफल होने के बाद अन्य जिलों में भी इसे लागू करने की योजना है।

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