धर्म

श्रीमद् भागवत कथा: “ईश्वर का हर विधान मंगलकारी”, सकारात्मकता से बदलेगा जीवन*! 

ऐलनाबाद,सिरसा ( रमेश भार्गव ):* रानिया रोड स्थित.वीर महाराणा प्रताप नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। यज्ञाचार्य दीदी श्रीजी ने अपनी अमृतमयी वाणी से भक्तों को जीवन जीने की कला और धैर्य का मार्ग दिखाया।

*प्रभु की लीला में कल्याण: सकारात्मक दृष्टिकोण (Positive Way)*

 

कथा के दौरान दीदी श्रीजी ने एक अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि:

“प्रभु जो भी करते हैं, वह हमेशा अच्छे के लिए ही होता है।” हमें जीवन की हर विपरीत परिस्थिति को नकारात्मकता के बजाय Positive Way (सकारात्मक तरीके) से लेना चाहिए। यदि आज कोई संकट है, तो वह कल के बड़े सुख की तैयारी है। ईश्वर पर अटूट विश्वास ही सुख का आधार है।

 

*भावी पीढ़ी के लिए संस्कार: धैर्य, संयम और विवेक*

 

आज की कथा में विशेष रूप से अभिभावकों और बच्चों के लिए मार्गदर्शन दिया गया। दीदी जी ने बताया कि बाल्यकाल से ही बच्चों में *धैर्य (Patience), संयम (Self-control) और विवेक (Wisdom)* के गुण कैसे विकसित किए जाएं:

• बच्चों को बचपन से ही संघर्षों का सामना करना सिखाएं ताकि उनमें धैर्य आए।

• सात्विक आहार और आध्यात्मिक वातावरण से संयम विकसित होता है।

• सही और गलत के बीच भेद करने की शक्ति यानी ‘विवेक’ केवल सत्संग से ही संभव है।

*मौन साधक महंत गोविंदाचार्य जी का दिव्य आशीर्वाद*

कार्यक्रम का सबसे भावुक और ऊर्जावान क्षण वह था, जब वर्तमान में मौन साधना कर रहे महंत गोविंदाचार्य जी ने भक्तों के कल्याण हेतु अल्प समय के लिए अपना मौन खोला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को अपने आशीर्वचनों से कृतार्थ किया और *राष्ट्रवाद व धर्म* के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। उनकी उपस्थिति मात्र से ही पांडाल में आध्यात्मिक चेतना का संचार हो गया।

 

* *रात्रि का आनंद: हरि चर्चा एवं संकीर्तन*

कथा के उपरांत रात्रि बेला में *श्री दुर्गा मंदिर* (SMB कॉलेज के पास, सिरसा) का प्रांगण श्रीहरि के जयकारों से गूँज उठा। यहाँ आयोजित *’हरि चर्चा एवं संकीर्तन’* में भक्तों ने झूमते हुए प्रभु का गुणगान किया। मधुर भजनों और दिव्य संकीर्तन ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

मस्तक पर तिलक और हाथों में कलावा बांधे श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था।

*मुख्य अंश:*

*समरसता संकल्प:* समाज को एकजुट करने की मुहिम।

*दिव्य वातावरण:* वैदिक मंत्रों और भागवत चर्चा से क्षेत्र हुआ पावन।

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