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टिब्बी के भुरानपुरा में कृत्रिम दूध बनाने का भंडाफोड़, चिकित्सा विभाग की बड़ी कार्रवाई*

तेल, सोरबिटोल और डिटरजेंट पाउडर से तैयार हो रहा था सिंथेटिक दूध*

हनुमानगढ़। आमजन के स्वास्थ्य से जुड़े एक गंभीर मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने टिब्बी ब्लॉक के गांव भुरानपुरा में बड़ी कार्रवाई करते हुए कृत्रिम/सिंथेटिक दूध बनाने के गोरखधंधे का खुलासा किया है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा के निर्देशन में विभागीय टीम ने गांव में सघन निरीक्षण अभियान के तहत एक घर के भीतर रिफाइंड तेल, सोरबिटोल और डिटरजेंट पाउडर की सहायता से नकली दूध तैयार किया जा रहा था।

 

सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली कि गांव भुरानपुरा में कुछ लोगों द्वारा रिफाइंड तेल, सोरबिटोल और डिटरजेंट पाउडर से कृत्रिम/सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा है। इस कृत्रिम/सिंथेटिक दूध को गायों से निकाले गए दूध में मिक्स कर बाजार में बेचा जा रहा है। सूचना के आधार पर विभागीय टीम द्वारा सुबह-सुबह ही मांगीलाल पुत्र मंजीत सिंह के घर पर दबिश दी। जांच के दौरान घर के एक कमरे में दिनेश सिद्ध पुत्र मांगीलाल मिक्सी की सहायता से कृत्रिम दूध तैयार करते हुए पाया गया। निरीक्षण के दौरान मौके पर रखी दो बाल्टियों में एकत्रित दूध के सिंथेटिक होने की आशंका पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 तथा विनियम 2011 के तहत दूध के दो नमूने लिए गए और जांच के लिए बीकानेर की जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला में भिजवाए गए।

 

डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके पर लगभग 100 लीटर सोरबिटोल, 10 लीटर रिफाइंड ऑयल और करीब 50 लीटर दूध बरामद किया, जिन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौके पर ही नष्ट करवाया गया। कृत्रिम/सिंथेटिक दूध बनाने के संबंध में अनुसंधान एवं जांच प्रक्रिया पूर्ण कर अतिशीघ्र संबंधित के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे पिछले 15 से 20 दिनों से सिंथेटिक दूध तैयार कर रहे थे। प्रतिदिन करीब 70 से 80 लीटर नकली दूध तैयार कर उसे घर की पालतू गायों के दूध में मिलाया जाता था। इसके बाद इस मिश्रित दूध को गांव केविभिन्न दुग्ध संग्रहण केन्द्रों पर सप्लाई किया जाता था। इस खुलासे के बाद क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई है तथा ग्रामीणों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

 

*गांव में अन्य संस्थानों की भी हुई जांच*

डॉ. शर्मा ने बताया कि विभाग ने केवल मौके की कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि गांव में अन्य दुग्ध उत्पादों की भी जांच शुरू कर दी। टीम ने गांव स्थित 11 आरडब्ल्यूडी दुग्ध उत्पादक समिति से मिक्स दूध एवं घी के नमूने लिए। इसके अलावा 13 आरडब्ल्यूडी दुग्ध सागर मिल्क सेंटर (बावल डेयरी फार्म) से भैंस के दूध के नमूने भी एकत्रित किए गए। वहीं स्वामी किरयाना स्टोर से हरियाणा गोल्डन ब्रांड घी का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है।

 

*निरीक्षण दल में यह रहे शामिल*

निरीक्षण दल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवनीत शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी रफीक मोहम्मद, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुदेश कुमार गर्ग, एमएफटीएल टैक्नीशयन पवन छीम्पा, वाहन चालक मलकीत सिंह, गुरुशरण सिंह एवं निहालसिंह, गार्ड अशोक कुमार एवं हीरावल्लभ शर्मा उपस्थित रहे। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आमजन से आह्वान किया किसी भी प्रकार की मिलावट की जानकारी जिला कंट्रोल रूम नम्बर 01552-261190 पर दी जा सकती है।

 

*सिंथेटिक दूध की पहचान के कुछ सामान्य संकेत*

– दूध में साबुन जैसा झाग ज्यादा बनना

– स्वाद में कड़वाहट या कृत्रिम मिठास

– गर्म करने पर असामान्य गंध

– हाथों में रगडऩे पर चिकनाहट महसूस होना

 

*सिंथेटिक दूध पीने के संभावित नुकसान*

– पेट और पाचन तंत्र पर असर : पेट दर्द, गैस, उल्टी, दस्त, आंतों में जलन एवं फूड पॉइजनिंग की आशंका।

– लीवर और किडनी को नुकसान : लीवर पर दबाव, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित एवं लंबे समय में अंगों को स्थायी नुकसान का खतरा।

– बच्चों पर गंभीर प्रभाव : पेट संक्रमण, कमजोरी और कुपोषण, दिमागी और शारीरिक विकास प्रभावित एवं इम्यूनिटी कमजोर होना।

– त्वचा और शरीर में एलर्जी : त्वचा पर खुजली या चकत्ते, एलर्जिक रिएक्शन एवं आंखों और गले में जलन।

– हृदय संबंधी खतरे : बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल एवं हृदय रोगों का खतरा।

– डिटरजेंट का सबसे बड़ा खतरा : मुंह और गले में जलन, पेट की अंदरूनी परत को नुकसान एवं गंभीर मामलों में विषाक्त प्रभाव।

– गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक : संक्रमण का खतरा बढऩा, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित एवं कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या।

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