Flash Story
आरटीई भुगतान में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग
ऐलनाबाद कांग्रेस की बैठक, 9 अगस्त को सिरसा में जिलास्तरीय सम्मेलन
यातायात पुलिस की बड़ी कार्रवाई, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कसा शिकंजा
नगर परिषद व पंचायती राज चुनावों की तैयारियों को लेकर कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक संगठन सशक्त करने, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर हुआ मंथन
पंजाबी समाचार पत्र ‘कलम’ के वरिष्ठ सह-संपादक गुरदेव सिंह सैनी का 70वां जन्मदिन सोमवार को जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया।
अलसुबह होलसेल सब्जी मंडी पहुंचे सीडब्ल्यूसी बेंच मजिस्ट्रेट जितेन्द्र गोयल, किया सघन निरीक्षण
भाखड़ा, गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर में पानी की समस्या के समाधान को लेकर चीफ इंजीनियर से मिले जनप्रतिनिधि
महिला सुरक्षा एवं जागरूकता को लेकर एक विशेष पहल
10 अगस्त के ‘जेल भरो आंदोलन’ को सफल बनाने की रणनीति तैयार, गांव-गांव चलेगा जनजागरण अभियान

पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

-लंबित मांगों के समाधान की मांग, पक्षपातपूर्ण रवैये पर जताया रोष
हनुमानगढ़।
 पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन, राजस्थान जिला शाखा हनुमानगढ़ ने मंत्रालयिक संवर्ग की लंबित मांगों के समाधान को लेकर राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी करते हुए आर-पार के आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने मुख्यमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायतीराज मंत्री, मुख्य सचिव एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों से पंचायतीराज संस्थाओं में कार्यरत करीब 18 हजार मंत्रालयिक कर्मचारियों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
संगठन का कहना है कि कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 की जांच का हवाला देकर मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों को लंबित रखा गया है, जबकि किसी भी अन्य संवर्ग के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विभाग द्वारा बार-बार एक ही भर्ती की अलग-अलग स्तर पर जांच करवाई जा रही है और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों को जानबूझकर टाला जा रहा है। संगठन ने इसे मंत्रालयिक कर्मचारियों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया बताते हुए गहरा असंतोष व्यक्त किया है।
संगठन ने मांग की है कि ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ एवं वरिष्ठ सहायकों का जॉब चार्ट ग्राम विकास अधिकारियों के समान अधिकारों सहित जारी किया जाए। पंचायत लेखों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सिंगल ओटीपी व्यवस्था समाप्त कर वित्त विभाग के निर्देशानुसार मेकर, चेकर और अप्रूवर प्रणाली लागू की जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए उत्तराखंड राज्य की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में मंत्रालयिक संवर्ग के कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति पदों की संख्या बढ़ाने, अंतरजिला स्थानांतरण की अनुमति देने तथा न्यायालय के आदेशों के अनुरूप नोशनल लाभ प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों को समान संवर्ग के अन्य कार्मिकों के बराबर अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
इसके अलावा कनिष्ठ सहायक पद की शैक्षणिक योग्यता स्नातक करने, ग्रेड पे 3600 लागू करने, हार्ड ड्यूटी अलाउंस एवं अतिरिक्त प्रभार भत्ता स्वीकृत करने तथा मंत्रालयिक संवर्ग से ग्रामीण विकास राज्य सेवा में पदोन्नति के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
जिला अध्यक्ष जगपाल मान ने कहा कि मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह न्यायोचित हैं और लंबे समय से लंबित हैं। यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। प्रदेश समन्वयक घनश्याम कड़वासरा, महासंघ के जिला अध्यक्ष इंद्रजीत शर्मा, जिला महामंत्री राजेश गोदारा सहित बादल सिंह, रोबिन सिंह, जीतराम, बलदेव सिंह, ममता, वीरपाल, आशा, भूपेंद्र सिंह, परविंदर और निर्भय सहित अनेक पदाधिकारियों ने सरकार से तत्काल मांगों पर निर्णय लेने की मांग की है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी जारी रही तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी।

Back To Top