ऐलनाबाद 18 जुलाई (रमेश भार्गव) कल शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर पहुँचकर आदरणीय श्री सोनम वांगचुक जी से मुलाक़ात कर उनके शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष के प्रति इंडियन नेशनल लोकदल की ओर से अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की खो रही विश्वसनीयता और जवाबदेही की लड़ाई है…
जब मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के सपने बार-बार पेपर लीक, अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ने लगें तब मौन रहना भी अन्याय का साथ देने जैसा है। लोकतंत्र में ग़लत का विरोध करना और सच के लिए संघर्ष करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार को किसी भी सत्ता के अहंकार से दबाया नहीं जा सकता।
जो सरकार युवाओं के सवालों का जवाब देने के बजाय उनकी आवाज़ को अनसुना करती है, वह यह न भूले कि इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज़ को दबाया जा सकता है लेकिन हराया नहीं जा सकता। सत्ता की ताकत जनता के विश्वास से चलती है और जब वही विश्वास टूटने लगता है तो सबसे मज़बूत सिंहासन भी डगमगाने लगते हैं।
हम स्पष्ट करना चाहते है है कि देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की इस लड़ाई में हम पूरी मजबूती से इस संघर्ष के साथ खड़े हैं। सरकार को चेतावनी है कि वह अहंकार छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाए, युवाओं की जायज़ माँगों पर तत्काल निर्णय ले और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करे।
यह वही सरकार है जिसे जनदबाव के आगे कई बार अपने फैसले बदलने पड़े हैं। इसलिए सत्ता यह भ्रम न पाले कि युवाओं की आवाज़ को अनदेखा कर देगी। जिस दिन देश का युवा एकजुट होकर अपने भविष्य के लिए खड़ा हो जाता है उस दिन सत्ता को जनता की इच्छा के आगे झुकना ही पड़ता है।

