युवाचार्य श्री महावीर मुनि के सानिध्य में डॉ. लिपि जैन द्वारा लिखित पुस्तक

लाडनूं 08 अगस्त 2026। कस्बे के जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा युवाचार्य श्री महावीर मुनि का अभिनंदन समारोह संस्थान के महाश्रमण ऑडिटोरियम में
आयोजित किया गया। अवसर पर अहिंसा एवं शांति विभाग की सहायक आचार्य एवं युवा विदुषी डॉ. लिपि जैन द्वारा लिखित पुस्तक
“जैन विजन फोर सस्टेनेबल एंड पीसफुल एक्सीडेंट्स” विषयक पुस्तक का लोकार्पण युवाचार्य श्री महावीर मुनि के पावन सान्निध्य व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष वर्तमान संयोजक धर्मचंद लूंकड एवं पुस्तक लेखिका डॉ. लिपि जैन द्वारा किया गया।
इस अवसर पर तेरापंथ धर्मसंघ के युवाचार्य श्री महावीर मुनि ने अपने आशीर्वचन में जैन दर्शन की सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन दर्शन केवल आध्यात्मिक साधना का मार्ग नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलित संबंध स्थापित करने वाली जीवन-दृष्टि है। बताया जाता है कि यह पुस्तक जैन विश्वभारती संस्थान द्वारा स्वीकृत एवं समर्थित शोध परियोजना का महत्वपूर्ण अकादमिक परिणाम है।
जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जैन विश्वभारती संस्थान जैन दर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन अकादमिक विमर्श से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने डॉ. लिपि जैन को इस महत्वपूर्ण शोधपरक कृति के लिए बधाई दी और कहा कि ऐसी रचनाएँ संस्थान की शोध एवं ज्ञान-सृजन की परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।
लेखिका डॉ. लिपि जैन ने जानकारी देते हुए कहा कि पुस्तक के माध्यम से जैन दर्शन के शाश्वत सिद्धांतों को वर्तमान वैश्विक संदर्भ से जोड़ते हुए सतत विकास, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत किया है। उन्होंने पुस्तक संबंधी समस्त बिंदुओं को उपस्थित सभा के समक्ष प्रस्तुत किया।
लेखिका डॉ. लिपि जैन ने पुस्तक के प्रकाशन के लिए जैन विश्वभारती संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृति उनके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध और मानवीय मूल्यों को समाज के व्यापक हित से जोड़ने का प्रयास है।
डॉ. जैन की पुस्तक “जैन विजन फोर सस्टेनेबल एंड पीसफुल एक्सीडेंट्स” शोधार्थियों, शिक्षाविदों तथा जैन दर्शन और सतत विकास के अध्येताओं के लिए उपयोगी संदर्भ कृति सिद्ध होने की अपेक्षा व्यक्त की गई।
बताया जाता है कि डॉ. जैन 5 अन्य पुस्तकों का लेखन तथा 2 पुस्तकों का संपादन कार्य कर चुकी है।
आपके साहित्य साधना एवं उत्कृष्ट लेखन साहित्य, संपादन के लिए डॉ. लिपि को अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से पुरस्कृत किया जा चुका है।
इस अवसर पर जैन विश्वभारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़, जयंतीलाल सुराणा, प्रो. बिल जैन, प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास, प्रो. जिनेंद्र जैन, प्रो. रेखा तिवारी, प्रो. युवराज सिंह खंगारोत, प्रो. वंदना कुंडलिया, संस्थान परिवार सहित एवं सैकड़ो विद्यार्थी, शैक्षिक सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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