परिवार न्यायालय में काउंसलिंग से सुलझा विवाद, माला पहनाकर पति-पत्नी को साथ भेजा घर
हनुमानगढ़। करीब तीन वर्षों से चल रहे वैवाहिक विवाद में परिवार न्यायालय की काउंसलिंग के प्रयासों से एक परिवार फिर से बस गया। काउंसलर श्रीमती रेशमी सियाग की समझाइश और लगातार काउंसलिंग के प्रयासों से गुरबचन सिंह और सोना देवी के बीच चल रहा विवाद समाप्त हुआ और दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई। इसके बाद परिवार न्यायालय में दोनों को माला पहनाकर खुशी-खुशी घर भेजा गया।
जानकारी के अनुसार गुरबचन सिंह बनाम सोना देवी का प्रकरण करीब तीन साल से परिवार न्यायालय में चल रहा था। पति-पत्नी के बीच विवाद के चलते दोनों अलग-अलग रह रहे थे। दंपती के दो बच्चे हैं, ऐसे में लंबे समय से चले आ रहे विवाद का असर पूरे परिवार पर पड़ रहा था।
प्रकरण में काउंसलर श्रीमती रेशमी सियाग ने विशेष भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों से अलग-अलग और संयुक्त रूप से संवाद किया। उन्होंने पति-पत्नी के बीच मतभेदों के कारणों को समझते हुए उन्हें आपसी संवाद, विश्वास और पारिवारिक जिम्मेदारियों के महत्व के बारे में समझाया। काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों को अपने विवाद को आपसी सहमति से समाप्त कर परिवार को दोबारा एक साथ रखने के लिए प्रेरित किया गया।
रेशमी सियाग के निरंतर काउंसलिंग प्रयासों और परिवार न्यायाधीश श्री अशोक टाक के प्रयासों से दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। पति-पत्नी ने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए साथ रहने का निर्णय लिया। इसके बाद न्यायालय परिसर में दोनों को माला पहनाकर एक-दूसरे के साथ घर भेजा गया।
इस अवसर पर परिवार से जुड़े लोगों ने काउंसलिंग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय पर सही संवाद और समझाइश से कई पारिवारिक विवादों का समाधान संभव है। खासकर ऐसे मामलों में जहां बच्चे भी जुड़े हों, परिवार को टूटने से बचाने के प्रयास महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
प्रकरण में सोना देवी की पैरवी अधिवक्ता महेन्द्र जोहल तथा गुरबचन सिंह की पैरवी अधिवक्ता राजीव कुलश्रेष्ठ ने की। दोनों अधिवक्ताओं ने भी समझौते की प्रक्रिया में सहयोग किया।
दंपती के दोबारा साथ आने से परिवार में खुशी का माहौल रहा। काउंसलर रेशमी सियाग के प्रयासों से तीन साल से अलग रह रहे पति-पत्नी के बीच सुलह होना परिवार न्यायालय की काउंसलिंग व्यवस्था की उपयोगिता को भी सामने लाता है।

