शिक्षा के स्तर को ऊंचाई देने पर जोर
-हनुमानगढ़ में संपन्न हुआ राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद प्रधानाचार्यों का जिला स्तरीय सम्मेलन

हनुमानगढ़। पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हनुमानगढ़ जंक्शन में राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा पी) प्रधानाचार्यों का जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन संपन्न हुआ। यह दो दिवसीय सम्मेलन जिलेभर के शैक्षिक विकास और नीतिगत सुधारों पर केंद्रित रहा। सम्मेलन के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिले के 153 प्रधानाचार्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एडीपीसी रमसा सुनीता भठेजा रहीं। विशिष्ट अतिथियों में सीबीईओ रावतसर सुरेंद्र धूड़िया, शिक्षा अधिकारी राजेंद्र यादव, पन्नालाल शर्मा, दुर्गादत्त सैनी, रणवीर शर्मा एडीओ, प्रेम दूधवाल एडओ, एसीबीईओ रजनीश गोदारा, लक्ष्मीकांत स्वामी, गुरमीत छाबा, हरीश बेनीवाल और दीपक मिड्ढा शामिल रहे।

सम्मेलन का पहला सत्र नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न आयामों पर केंद्रित रहा। इसमें बाल वाटिका की महत्ता, व्यवसायिक शिक्षा की उपयोगिता, विद्यालय संसाधन विकास, प्रखर राजस्थान 2.0 जैसी पहल और रीड़ एथोन के प्रभावी संचालन पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों से जोड़ने का सशक्त साधन है।
दूसरे सत्र में प्रधानाचार्यों की समस्याओं और मांगों पर मंथन हुआ। इसमें स्टॉफिंग पैटर्न में सुधार, स्थानांतरण नीति को पारदर्शी बनाने, वर्ष 2016 से लंबित तिथि अंकन को पूरा करने, यथास्थान प्रधानाचार्यों की काउंसलिंग के माध्यम से शीघ्र पदस्थापन करने, गैर-शैक्षिक कार्यों से मुक्ति दिलाने, पीईईओ और यूसीईईओ विद्यालयों में अतिरिक्त स्टॉफ की नियुक्ति तथा रिक्त पदों को भरने की प्रमुख मांगें उठाई गईं।

प्रधानाचार्यों ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल शैक्षिक गतिविधियों तक सीमित रहनी चाहिए और उन्हें गैर-शैक्षिक कार्यों में उलझाने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। साथ ही, उन्होंने विद्यालयों में मानव संसाधन की कमी को पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में राज्य सरकार द्वारा हाल ही में की गई पदोन्नतियों और नई भर्तियों के लिए आभार व्यक्त किया गया। इनमें प्राध्यापक, अध्यापक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद शामिल हैं। प्रधानाचार्यों ने कहा कि इन भर्तियों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है और ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों को भी लाभ होगा।
रेसा पी जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह ने बताया कि परिषद के प्रत्येक प्रधानाचार्य राज्य सरकार द्वारा संचालित समस्त शैक्षिक योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाने के लिए सभी प्रधानाचार्य लगन और निष्ठा से कार्य करेंगे।

जिला मंत्री पवन कौशिक ने सम्मेलन के पूर्व सत्र में किए गए कार्यों का प्रतिवेदन एवं लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों, योजनाओं की प्रगति और शैक्षिक नवाचारों का विवरण शामिल रहा।
सम्मेलन में जिलेभर से आए प्रधानाचार्यों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इनमें चौथराम भद्रा, महावीर भाखर, कुलविंद्र सिंह बराड़, पवन पारीक, राजेंद्र डाल, राधेश्याम कोटी, राकेश सेठी, सूरज डाबला, अशगर अली, हवा सिंह, हरि सिंह पूनिया, सत्यदेव राठौड़, लखविंद्र सिंह, जगदीश भाटी, हंसराज सबलानिया, महावीर सर्वा, महेंद्र चौहान, सुमन बिश्नोई, सुनीता यादव, मंजु टाक, रेणु तनेजा, सरिता नारंग, मंजू यादव और रेणु लेखरा सहित कई प्रधानाचार्य शामिल रहे।
सम्मेलन का समापन शिक्षा के स्तर को सुदृढ़ करने और नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ। प्रधानाचार्यों ने एक स्वर में कहा कि वे शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।



