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संसद के समक्ष शिक्षकों का विशाल धरना

  • शिक्षक संगठनों की अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष समिति (AIJACTO) ने आज दिनांक 5 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में संसद के समक्ष जंतर-मंतर पर शक्तिशाली धरने का सफल आयोजन किया। यह धरना शिक्षक आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। पहली बार स्कूल शिक्षा क्षेत्र के अनेक राष्ट्रीय स्तर के शिक्षक संगठनों ने एक मंच पर आकर लंबे समय से लंबित शिक्षक-समस्याओं के समाधान हेतु संयुक्त संघर्ष की शुरुआत की। इस राष्ट्रीय स्तर के विशाल धरने में राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) के प्रदेशाध्यक्ष महावीर सिहाग, महामंत्री उपेन्द्र शर्मा, कोषाध्यक्ष राधेश्याम यादव, संघर्ष समिति संयोजक पोखर मल और उपाध्यक्षगण सुनिता सिहाग, अशोक लोदवाल, हेमन्त खराड़ी तथा प्रदेश मंत्री संजय पुरोहित, उपसभाध्यक्ष रेवन्त राम गोदारा व संयुक्त मंत्री शुभ करण नैन हनुमानगढ़ जिला अध्यक्ष जगनन्दन सिंह अयालकी,जिला मंत्री रामनिवास,जिला उपाध्यक्ष दयारामजी, राजेन्द्र जी सक्सेना,इमीलाल समेत सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।

धरने की अध्यक्षता एक प्रतिष्ठित अध्यक्ष मंडल ने की, अध्यक्ष मंडल में

सी.एन. भारती (STFI), के. नरसिंहा रेड्डी (AISTF), बसवराज गुरिकर (AIPTF) एवं सी.एल. रोज़ (AIFTO) शामिल थे।

इस अवसर पर अनेक प्रमुख अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों ने एकजुटता व्यक्त की। सांसद जॉन ब्रिटास CPI(M) फ्लोर लीडर, सेल्वराज (CPI), वी. शिवदासन (CPIM), कुमार नाइक (कांग्रेस) तथा राजा राम सिंह (CPI ML) ने धरने को संबोधित करते हुए शिक्षकों की मांगों का समर्थन किया और उन्हें संसद में उठाने का आश्वासन दिया।

इसके अतिरिक्त CPI के राष्ट्रीय नेता के. नारायण; शिक्षक MLC गोपी मूर्ति (आंध्र प्रदेश) एवं श्रीपाल रेड्डी (तेलंगाना); खेत मजदूर यूनियन के महासचिव बी. वेंकट; AIJACTO की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य — चावा रवि (STFI), सदानंदम गौड़ (AISTF), कमल कांत त्रिपाठी (AIPTF), राममूर्ति स्वामी (AIFETO), पी. दामोदर रेड्डी (AIFTO);

JFME की सभापति प्रो. नंदिता नारायण; वर्ड टीचर्स फेडरेशन के अध्यक्ष अमियकुमार मोहन्ती; अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (AIFUCTO) के महासचिव डॉ. अरुण कुमार; AIFRTE के सचिव प्रो. विकास गुप्ता; AISEC की सचिव शारदा दीक्षित;

AIITA के अध्यक्ष रिज़वान सहित अनेक वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।

अपने ओजस्वी संबोधनों में वक्ताओं ने AIJACTO के गठन को शिक्षक आंदोलन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए विभिन्न शिक्षक संगठनों के बीच बनी एकता की सराहना की। सभा ने यह भी स्वीकार किया कि TET का मुद्दा तथा सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय अनजाने में देशभर के शिक्षकों को एक मंच पर लाने का कारण बना।

हालाँकि शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मंशा को स्वीकार करते हुए, शिक्षकों ने इस न्यायिक निर्णय के कठोर और अन्यायपूर्ण परिणामों की कड़ी निंदा की। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक पढाने वाले वे कार्यरत शिक्षक जिनकी सेवा में पाँच वर्ष से अधिक शेष हैं, उन्हें दो वर्ष के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करनी होगी, अन्यथा उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष या उससे कम समय शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए TET से छूट दी गई है, लेकिन पदोन्नति के लिए वे भी अयोग्य माने जाएंगे।

यह निर्णय NCTE की 23.08.2010 की अधिसूचना के विपरीत है, जो RTE अधिनियम के लागू होने के समय जारी की गई थी। उस अधिसूचना में TET को केवल 23 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया गया था तथा सभी सेवारत शिक्षकों को इससे स्पष्ट रूप से छूट दी गई थी। राज्य सरकारों ने भी इसी के अनुरूप नीतियाँ अपनाईं और पिछले 15 वर्षों से सेवारत शिक्षकों से TET की अपेक्षा नहीं की गई।

शिक्षक संगठनों ने NCTE की इस गंभीर चूक की आलोचना की कि उसने ये तथ्य सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत नहीं किए, जिसके परिणामस्वरूप यह प्रतिकूल निर्णय आया।

शिक्षकों ने पाँच वर्ष की सेवा-शेष सीमा को मनमाना बताते हुए इसकी आलोचना की तथा यह भी इंगित किया कि दो वर्षों में TET उत्तीर्ण न करने पर नौकरी से बर्खास्तगी जैसी कठोर सज़ा — चाहे सेवा में एक दिन भी अधिक शेष क्यों न हो — पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

शिक्षक संगठनों ने केंद्र सरकार से माँग की कि वह सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु RTE अधिनियम में संशोधन करे तथा सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार अथवा क्यूरेटिव याचिका दायर करे।

TET के अतिरिक्त, धरने में निम्नलिखित प्रमुख मांगें भी उठाई गईं:

* पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली तथा NPS के खिलाफ 22 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बावजूद हाल ही में लाई गई एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को अस्वीकार करना।

* नई शिक्षा नीति (NEP) – 2020 के सभी जनविरोधी, बाज़ारीकरण और केंद्रीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रावधानों को वापस लेना।

* विद्यालयों को बंद करने एवं विलय करने की नीति पर तत्काल रोक लगाना। (पिछले पाँच वर्षों में एक लाख से अधिक स्कूल बंद कर दिये गये हैं)।

* प्राथमिक शिक्षकों को विधान परिषदों में शिक्षक MLC चुनावों में मतदान का अधिकार प्रदान करना।

* वेतनभोगी कर्मचारियों पर आयकर का बोझ कम करना।

* अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण एवं उनके लिए न्यूनतम वेतन का क्रियान्वयन।

 

AIJACTO ने चेतावनी दी है कि केंद्र सरकार इन सभी मुद्दों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई करे अन्यथा, समिति इस अभूतपूर्व संयुक्त मंच को और सशक्त करते हुए आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तीव्र करेगी। संयुक्त संघर्ष समिति ने त्वरित रूप से आन्दोलन तेज करने का संकल्प दोहराया और ऐलान किया कि यह संयुक्त मंच देशभर के शिक्षकों की सामूहिक आवाज़ और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। AIJACTO देश के सभी शिक्षकों, शिक्षा कर्मियों और समर्थकों से इस संयुक्त आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान

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