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सेवा, समर्पण और सद्भाव की प्रतीक। हर खुशी को दोगुना करने का संकल्प*

*25वर्षों का विश्वास*

*सेवा, समर्पण और सद्भाव की प्रतीक। हर खुशी को दोगुना करने का संकल्प*

*सोनिया महंत*

 

ऐलनाबाद, 18 फरवरी (रमेश भार्गव) जब किसी शहर की पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां बसने वाले लोगों की मुस्कान से होने लगे, तब समझिए कि उस शहर को सोनिया महंत जैसी समर्पित शख्सियत का साथ मिला है। ऐलनाबाद की गलियों से लेकर दिलों तक, पिछले 25 वर्षों में सोनिया महंत ने सेवा, आस्था और समर्पण की ऐसी मिसाल कायम की है, जो आज हर जुबान पर है।

सोनिया महंत का स्पष्ट कहना है, “ऐलनाबाद शहर के लोगों की खुशी मेरी पहली प्राथमिकता है। मैं हर संभव प्रयास करूंगी कि यहां के लोगों की हर खुशी दोगुनी हो।” यह केवल शब्द नहीं, बल्कि उनके वर्षों के सेवा कार्यों की सच्ची गवाही है।

वे अपने इष्ट देव जय भोले बाबा से प्रार्थना करती हैं कि शहर के हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, और क्षेत्र में अमन-चैन बना रहे।

*किन्नर समाज का दस दिवसीय महायज्ञ* — अमन और सौहार्द का संदेश

इस वर्ष ऐलनाबाद ने एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त किया। पूरे भारतवर्ष के किन्नर समाज का दस दिवसीय भव्य महायज्ञ सम्मेलन यश रिसॉर्ट में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से लगभग ढाई से तीन हजार किन्नर समाज के लोग शामिल हुए।

इस महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्षेत्र में अमन, चैन और खुशहाली की कामना था। आयोजन की संपूर्ण जिम्मेदारी सोनिया महंत ने अपने कंधों पर उठाई। उनकी देखरेख में शहर के मुख्य मार्गों से निकली भव्य शोभायात्रा ने ऐलनाबाद को भक्ति, एकता और सौहार्द के रंग में रंग दिया। हर गली में श्रद्धा की गूंज थी और हर चेहरे पर आस्था की चमक।

*सेवा ही जीवन — हर सुख-दुख में सबसे आगे*

सोनिया महंत केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं हैं। किसी जरूरतमंद कन्या के विवाह की बात हो, सामाजिक कार्यक्रम हो या धार्मिक आयोजन — वे हर मोर्चे पर अग्रिम पंक्ति में खड़ी दिखाई देती हैं।

सर्दी के मौसम में जरूरतमंदों को कंबल, स्वेटर, लोई और चादर वितरित कर वे यह सुनिश्चित करती हैं कि कोई भी व्यक्ति ठंड से पीड़ित न रहे। यह संवेदनशीलता और अपनापन ही उन्हें ऐलनाबाद की जनता के दिलों के करीब ले आया है।

*25 वर्षों का अटूट रिश्ता — दिल से दिल तक*

सोनिया महंत बताती हैं,

“मैं 15 वर्ष की उम्र में ऐलनाबाद आई थी। आज मेरी उम्र 40 वर्ष है। इन 25 वर्षों में यहां की जनता ने जो प्यार, सम्मान और सहयोग दिया है, उसे मैं जीवन भर नहीं भूल सकती।”

यह रिश्ता केवल वर्षों का नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व का है — जो समय के साथ और भी मजबूत हुआ है।

*शहर की खुशियों में ही उनकी खुशी*

 

अंत में सोनिया महंत ने ऐलनाबाद के सभी नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा,

“भोले बाबा की कृपा से ऐलनाबाद के हर व्यक्ति का जीवन खुशियों से भर जाए, सपने पूरे हों और इस शहर की हर खुशी दोगुनी हो।”

आज ऐलनाबाद के लिए सोनिया महंत केवल एक नाम नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और सच्चे समर्पण की जीवंत मिसाल हैं।

जब शहर की धड़कन उसके लोगों की मुस्कान बन जाए — तब समझिए कि वहां सेवा की लौ सच्चे दिल से जल रही है।

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