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चार श्रम संहिताओं के विरोध में ‘काला दिवस’, श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन

धानमंडी से जिला कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

हनुमानगढ़। केंद्र सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं को लागू किए जाने के विरोध में मंगलवार को जिले में श्रमिक संगठनों ने ‘राष्ट्रव्यापी काला दिवस’ मनाया। इस दौरान सीटू सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों के बैनर तले श्रमिकों ने काले बैज लगाकर विरोध प्रदर्शन किया और जंक्शन धानमंडी से जिला कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च निकाला।
कार्यक्रम के तहत श्रमिकों ने हाथों और माथे पर काली पट्टियां बांधकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। रोष मार्च धानमंडी से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होता हुआ जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचा, जहां सभा का आयोजन किया गया। सभा के बाद राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चारों श्रम संहिताओं को बिना व्यापक परामर्श के लागू करने का निर्णय लिया है, जबकि देश के केंद्रीय श्रम संगठनों ने इसका लगातार विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इन संहिताओं को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की पूर्व घोषणा की गई थी, जिसके विरोध में पूरे देश में काला दिवस मनाया जा रहा है।
श्रमिक नेता रामेश्वर वर्मा का कहना है कि प्रस्तावित श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकारों में कटौती होगी। उनका आरोप है कि इन कानूनों के माध्यम से यूनियन बनाने की प्रक्रिया को कठिन बनाया जा रहा है, जबकि नियोक्ताओं के उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा रहा है। साथ ही हड़ताल के अधिकार को सीमित करने, कार्य समय को लचीला बनाकर बढ़ाने और ठेका प्रथा को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
श्रमिक नेता रघुवीर वर्मा ने कहा इन संहिताओं के लागू होने से सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी और बड़ी संख्या में श्रमिक इसके दायरे से बाहर हो जाएंगे। न्यूनतम वेतन से जुड़े प्रावधानों को भी कमजोर करने का आरोप लगाया गया। रघुवीर वर्मा ने कहा कि ये सभी बदलाव श्रमिक वर्ग को नुकसान पहुंचाने वाले हैं और उन्हें असंगठित क्षेत्र की ओर धकेलने का प्रयास है।
सभा को संबोधित करते हुए सीटू नेता सुल्तान खान और वारिस अली ने कहा कि देशभर में लाखों श्रमिक इन संहिताओं के विरोध में एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी 12 फरवरी को हुई आम हड़ताल में करोड़ों श्रमिकों ने भाग लेकर सरकार को अपना विरोध दर्ज कराया था, बावजूद इसके सरकार ने कोई ठोस संवाद नहीं किया।
श्रमिक नेताओं ने राष्ट्रपति से मांग की कि मजदूर हितों को ध्यान में रखते हुए चारों श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने श्रमिक विरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुटता के साथ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। सभा को कामरेड रामेश्वर वर्मा कामरेड रघुवीर वर्मा कामरेड सुल्तान खान  तरसेम सिंह वारसली शिवकुमार गुरप्रेम सिंह वाली शेर विनय कुमार हरदेव सिंह मुकद्दर अली गुरनाम सिंह बलदेव सिंह मक्कासर संबोधित किया।

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