Flash Story
जिला कलक्टर ने किया ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के पोस्टर का विमोचन
महंत भरत मुनि जी ने कथा की चढ़ावा राशि शिव नंदीशाला को की समर्पित, सेवा और गौ संरक्षण का दिया प्रेरणादायक संदेश
लाखों रूपए की 60 ग्राम 93 मिलीग्राम हेरोइन सहित युवक काबू ।
इनेलो की युवा और छात्र इकाई शुक्रवार, 24 जुलाई 2026, को पूरे हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर करेगी प्रदर्शन और उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति महोदय के नाम सौंपेंगी ज्ञापन
मुख्यमंत्री ने सिरसा के किन्नू को जीआई टैग मिलने पर दी बधाई
पहली ही तेज बारिश ने नगर परिषद के जल निकासी के तमाम दावों और तैयारियों की पोल खोलकर रख दी
जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने सरदारशहर स्थित पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में की शिरकत, विद्यार्थियों को किया सम्मानित
सांसद कुलदीप इंदौरा ने संसद में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में पोटाश भंडार के दोहन का मुद्दा उठाया और कहा कि पहचाने गए 17 ब्लॉकों में से केवल 2 की ही नीलामी हुई है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है।
घग्घर के पट्टड़ों का जिला कलक्टर ने किया निरीक्षण, तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश

पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु से होने वाले नुकसान के जोखिम से बचाएगी सामूहिक पशुधन बीमा योजना।

ऐलनाबाद, 23 अप्रैल (रमेश भार्गव )
पशुपालन को सुरक्षित और जोखिम मुक्त बनाने के उद्देश्य से  हरियाणा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लाभार्थियों सहित पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु से होने वाले नुकसान के जोखिम से वित्तीय सुरक्षा रियायती प्रीमियम दरों पर प्रदान की जाती है, जिससे आकस्मिक नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।
इस योजना की खास बात यह है कि पशुपालक अपने बड़े पशुओं का बीमा उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता के अनुसार मात्र 100 से 300 रुपये प्रीमियम देकर करवा सकते हैं, जबकि छोटे पशुओं के लिए यह प्रीमियम सिर्फ 25 रुपये निर्धारित किया गया है। इतना ही नहीं, अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों के लिए यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध करवाई गई है, जिससे कमजोर वर्ग के लोगों को विशेष राहत मिल रही है।
इसके साथ ही, पशुपालकों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दुर्घटना बीमा योजना में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले सहकारी दुग्ध समितियों से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को प्रति पहचान पत्र 5 पशुओं तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 10 कर दिया गया है। छोटे पशुओं की गणना के हिसाब से यह संख्या 100 तक हो सकती है। इस फैसले से पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
इस प्रकार की योजनाएं न केवल पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं, बल्कि प्रदेश में डेयरी व्यवसाय को भी बढ़ावा देती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए यह योजना किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही है।

Back To Top