नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने जोधपुर हाईकोर्ट में दायर की याचिका, राज्य सरकार को एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश

श्रीगंगानगर 25 अप्रैल। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन(आरसीए)में बार-बार अस्थायी समिति गठित करने के खिलाफ नागौर जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में रिट याचिका दायर की है। याचिका में राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह आरसीए के बायलॉज के अनुसार चुनाव कराने के बजाय मनमाने ढंग से बार-बार अयोग्य व्यक्तियों को अस्थायी समिति में नियुक्त कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार बैठे हुए मंत्रियों और विधायकों के निकट संबंधियों को अस्थायी समिति में नामित कर रही है, जबकि ये व्यक्ति आरसीए के कार्यकारी निकाय के सदस्य बनने के भी पात्र नहीं हैं। इनमें से अधिकांश व्यक्ति जोधपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी हैं, जिसे आरसीए से 11 अक्टूबर 2025 को पहले ही अलग (डिस-अफिलिएट) कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि डिस-अफिलिएटेड और अयोग्य व्यक्तियों को अस्थायी समिति में रखना आरसीए के बायलॉज तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की और इसे गंभीरता से लिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अतिरिक्त महाधिवक्ता नाथूसिंह राठौड़ को याचिका की प्रति देने के निर्देश दिए और राज्य सरकार को एक सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। याचिका की ओर से एडवोकेट लोकेश ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं।
डीसीए नागौर ने स्पष्ट किया है कि वह आरसीए के बायलॉज का पूर्ण पालन करते हुए राज्य में क्रिकेट प्रशासन को एक निर्वाचित, स्वतंत्र, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक निकाय के माध्यम से चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संगठन का कहना है कि अयोग्य व्यक्तियों को बार-बार अस्थायी समिति में नियुक्त कर आरसीए चलाने की प्रथा अब बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
यह याचिका राजस्थान में क्रिकेट प्रशासन में सुशासन और लोकतंत्र की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।


