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निजीकरण के खिलाफ हनुमानगढ़–श्रीगंगानगर में बिजली कर्मियों का महासैलाब

- सतीपुरा से कलेक्ट्रेट तक निकली ऐतिहासिक रैली, 2300 से अधिक कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर; सरकार को चेतावनी, फैसला वापस लो, वरना आंदोलन होगा और उग्र


हनुमानगढ़। राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति (हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर) के आह्वान पर सोमवार को दोनों जिलों में बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों ने निजीकरण के विरोध में अभूतपूर्व एकजुटता का प्रदर्शन किया। सतीपुरा स्थित विद्युत विभाग कार्यालय परिसर में आयोजित विशाल जनसभा में हजारों कर्मचारियों ने एक स्वर में निजीकरण का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ हल्लाबोल किया। इसके बाद सतीपुरा से जंक्शन स्थित जिला कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली गई, जहां मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
इस आंदोलन की खास बात यह रही कि करीब 2300 से 2400 कर्मचारियों और अधिकारियों ने एक दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन में भाग लिया। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के एक साथ अवकाश पर रहने से विभागीय कामकाज भी प्रभावित रहा, जिससे आंदोलन की गंभीरता और व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सुबह से ही सतीपुरा कार्यालय परिसर में कर्मचारियों का जुटना शुरू हो गया था। हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर दोनों जिलों से आए कर्मचारी बैनर और झंडों के साथ पहुंचे और निजीकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजकों अनिल चलका, अरविन्द गढ़वाल, राकेश झाझड़ा, सुनील गिरी, सतपाल स्वामी, जयप्रकाश लेघा, विनोद अग्रवाल, मीनू शर्मा, कुलवंत गिल, अनिरुद्ध पालसिंह, पिस्ता चौधरी और सरस्वती सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि जोधपुर डिस्कॉम के अंतर्गत हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर वृत्त के प्रस्तावित निजीकरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली विभाग केवल एक व्यावसायिक इकाई नहीं, बल्कि जनता को मूलभूत सेवाएं प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण संस्थान है। इसे निजी हाथों में सौंपने से आमजन, किसानों और छोटे उद्योगों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण के बाद बिजली दरों में भारी वृद्धि होगी और उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का सामना करना पड़ेगा।
सभा के बाद कर्मचारियों का जनसैलाब रैली के रूप में सतीपुरा से जंक्शन कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुआ। रैली के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर “निजीकरण वापस लो”, “बिजली विभाग बचाओ” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। रैली में शामिल कर्मचारियों ने अनुशासित तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि जोधपुर डिस्कॉम के हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर वृत्त के निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही उत्पादन, प्रसारण और वितरण निगमों में विभिन्न मॉडल के नाम पर किए जा रहे निजीकरण को भी बंद किया जाए।
संघर्ष समिति ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया का भी विरोध किया। पदाधिकारियों का कहना था कि इससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि पुराने मीटर भी बेकार हो जाएंगे। इसके अलावा उत्पादन निगम के थर्मल पावर प्लांटों को संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) के तहत निजी कंपनियों को सौंपने और प्रसारण निगम के ग्रिडों को इनविट या क्लस्टर मॉडल पर देने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाने की मांग की गई।
कर्मचारियों ने 33/11 केवी जीएसएस को ठेके पर देने के बजाय प्रदेश के बेरोजगार आईटीआई युवाओं के लिए स्थायी भर्ती निकालने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि तकनीकी कार्यों में दक्षता बनाए रखने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है।
सभा में वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया और निजीकरण की प्रक्रिया को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में धरना, प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
आंदोलन में दोनों जिलों के कर्मचारियों की एकजुटता ने यह साफ कर दिया कि निजीकरण के मुद्दे पर वे किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके हितों की नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों की भी है। कार्यक्रम के अंत में कुलदीप शर्मा, उमाशंकर, कुलदीप पुनिया, दीपक सिंधी, संदीप सिरावता, जितेन्द्र शेखावत, ओम गोदारा, दिनेश सांई,, गुरमुख सिंह, सतपाल बेनीवाल, लखवीर सिंह ने आये हुए समस्त कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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