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गेहूं खरीद प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग, किसानों ने जिला कलेक्टर को सुनाई आपबीती

हनुमानगढ़। गेहूं खरीद प्रकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और प्रभावित किसानों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि गेहूं खरीद के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है और प्रशासन अभी तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाया है।
किसानों का कहना है कि कुछ लोगों ने अधिक लाभ और लालच के चलते बड़ी मात्रा में किसानों का गेहूं अपने यहां गिरवा लिया था। अब वही लोग किसानों पर दबाव बनाकर गेहूं वापस उठाने के लिए कह रहे हैं, जिससे किसान मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि जब इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी किसानों के साथ शेरगढ़ स्थित एसएल कॉटन फैक्ट्री पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कथित रूप से कहा कि गेहूं हनुमानगढ़ के एडीएम और एसडीएम के कहने पर गिरवाया गया था।
इस मामले को गंभीर बताते हुए किसानों ने जिला कलेक्टर के समक्ष अपनी आपबीती रखी और कहा कि पूरे प्रकरण की गहन जांच होनी चाहिए। किसानों का कहना है कि यदि अधिकारियों के नाम लेकर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं तो ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की जिम्मेदारी तय हो सके।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री संचालक एक ओर यह कह रहा है कि फैक्ट्री ठेके पर दी हुई है, जबकि दूसरी ओर वह स्वयं किसानों को फोन कर गेहूं वापस उठाने के लिए कह रहा है। किसानों के अनुसार इस तरह के विरोधाभासी बयानों से मामले पर और अधिक संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे किसानों में निराशा और रोष बढ़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को शीघ्र न्याय नहीं मिला और समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए किसानों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेकर जल्द उचित कदम उठाएगा, जिससे प्रभावित किसानों को राहत मिल सके और पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
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