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श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया
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श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया

श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया

ऐलनाबाद, 17 जुलाई( रमेश भार्गव ) सनातन धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस कथा व्यास महंत श्री भरतमुनि उदासीन जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिमय वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के जन्मोत्सव को बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया।
गुरुदेव महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत का दशम स्कंध भगवान श्रीकृष्ण के मधुर एवं दिव्य लीलाओं का हृदय है। इसमें भगवान के जन्म, पूतना वध, शकट भंजन, तृणावर्त उद्धार, बकासुर वध, अघासुर वध, ब्रह्माजी का मोह, कालिय नाग का दमन, यमुना को विषमुक्त करना, गोचारण तथा गोवर्धन धारण जैसी अनेक दिव्य लीलाओं का वर्णन मानव जीवन को धर्म, भक्ति और आनंद का संदेश देता है।
अपने प्रवचन में गुरुदेव महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि हमारे जीवन में आनंद के अवतरण का प्रतीक है। जब मनुष्य अपने भीतर की तृष्णा, वासनाओं और अहंकार का त्याग करता है, तब उसके जीवन में वास्तविक आनंद का प्रकाश होता है। उन्होंने कहा कि रजोगुण, तमोगुण और अहंकार रूपी असुरों का नाश कर सात्विक जीवन अपनाने से ही मनुष्य परम शांति और आनंद को प्राप्त कर सकता है।
गुरुदेव महाराज ने कालिय नाग दमन लीला का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए कहा कि यह लीला इंद्रियों को संयमित करने की प्रेरणा देती है। जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखता है, उसका जीवन सदैव आनंदमय और सफल बनता है।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भजनों पर भावविभोर होकर नृत्य किया तथा भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे वातावरण में भक्ति, उल्लास और कृष्णमय आनंद की अनुभूति हुई।

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