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स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार करवा : निष्पक्ष पत्रकारिता, सादगी और मानवीय मूल्यों के पर्याय
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स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार करवा : निष्पक्ष पत्रकारिता, सादगी और मानवीय मूल्यों के पर्याय

स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार करवा : निष्पक्ष पत्रकारिता, सादगी और मानवीय मूल्यों के पर्याय

 

समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान उनके पद, प्रतिष्ठा या संपन्नता से नहीं, बल्कि उनके विचारों, कर्मों और जीवन मूल्यों से होती है। ऐसे लोग अपने जाने के बाद भी अपने संस्कारों, कार्यशैली और आदर्शों के कारण लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं। स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार करवा ऐसे ही विरले व्यक्तित्व थे। उनका संपूर्ण जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, सामाजिक संवेदनशीलता और निष्पक्ष पत्रकारिता का जीवंत उदाहरण रहा। 20 मई 2026 को उनके निधन के साथ संगरिया ने एक ऐसे पत्रकार, समाजसेवी और सज्जन नागरिक को खो दिया, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी।

 

हनुमानगढ़ जिले के संगरिया कस्बे में जन्मे श्री कृष्ण कुमार करवा, स्वर्गीय श्री बद्री प्रसाद करवा के सुपुत्र थे। बचपन से ही उन्हें परिवार से अनुशासन, परिश्रम, सादगी और सत्यनिष्ठा के संस्कार मिले। यही मूल्य आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली की पहचान बने। जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका विश्वास था कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके चरित्र, व्यवहार और कर्म से होती है, न कि पद या प्रतिष्ठा से।

 

पारिवारिक जीवन में वे एक आदर्श अभिभावक थे। उन्होंने अपने दोनों पुत्रों कपिल और गौरव को केवल उच्च शिक्षा ही नहीं, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम और सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार भी दिए। उनका मानना था कि माता-पिता की सबसे बड़ी विरासत धन-संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार होते हैं। उन्होंने स्वयं जिन मूल्यों को जीवनभर अपनाया, वही अपने परिवार को भी दिए।

 

श्री करवा अध्ययनशील प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ और पुस्तकें उनके दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा थीं। उनका विश्वास था कि निरंतर अध्ययन व्यक्ति की सोच को व्यापक बनाता है और समाज के प्रति उसकी संवेदनशीलता को बढ़ाता है। वे स्वयं नियमित अध्ययन करते और दूसरों को भी पढ़ने, सीखने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते थे।

 

पत्रकारिता उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय रही। वस्तुतः पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत थी। उनका परिवार वर्ष 1955 से “करवा न्यूज एजेंसी, संगरिया” के माध्यम से समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं के वितरण का कार्य कर रहा है। यह प्रतिष्ठान आज भी क्षेत्र के सबसे पुराने एवं निरंतर संचालित समाचार-पत्र विक्रेताओं में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। बचपन से ही समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और पत्रकारों के बीच पले-बढ़े श्री कृष्ण कुमार करवा का पत्रकारिता से जुड़ना स्वाभाविक था।

 

उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत दैनिक नवज्योति, पंजाब केसरी और सीमा संदेश जैसे प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों से की। इसके बाद वे राजस्थान पत्रिका से जुड़े और जीवन की अंतिम श्वास तक राजस्थान पत्रिका परिवार के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे। सीमित संसाधनों के उस दौर में भी उन्होंने पूरी निष्ठा, ईमानदारी और निर्भीकता के साथ पत्रकारिता का दायित्व निभाया। उनके समाचार सदैव तथ्यपरक, संतुलित और जनहित से जुड़े होते थे। आमजन की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाना तथा समाज की सकारात्मक गतिविधियों को प्रमुखता देना उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान थी।

 

उस समय करवा न्यूज एजेंसी केवल समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के वितरण का केंद्र नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र के सबसे सशक्त सूचना तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा भी थी। प्रतिदिन समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के लिए जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा उनके परिजनों का वहाँ आना-जाना लगा रहता था। समसामयिक घटनाओं, जनसमस्याओं और सामाजिक सरोकारों पर होने वाली चर्चाओं ने उनकी दृष्टि को और अधिक व्यापक बनाया। यही वातावरण आगे चलकर उनकी निष्पक्ष, संतुलित और जनपक्षधर पत्रकारिता की मजबूत नींव बना।

 

उन्होंने पत्रकारिता को कभी व्यक्तिगत लाभ, प्रसिद्धि या किसी का मान-मर्दन करने का माध्यम नहीं बनाया। उनका मानना था कि पत्रकार का धर्म केवल गलतियों को उजागर करना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाना भी है। यदि किसी व्यक्ति से कोई भूल हुई है और उसमें सुधार की संभावना है, तो उसे सुधरकर मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर अवश्य मिलना चाहिए। इसलिए उनकी लेखनी में आलोचना से अधिक सकारात्मक परिवर्तन की भावना दिखाई देती थी। वे गलतियों को उजागर करते थे, लेकिन व्यक्ति के सुधार और समाजहित को सदैव प्राथमिकता देते थे। सत्य, निष्पक्षता और विश्वसनीयता उनके पत्रकारिता जीवन के मूल सिद्धांत रहे। यही कारण था कि आमजन के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों का भी उन पर गहरा विश्वास था।

 

पत्रकारिता के साथ-साथ उनका सामाजिक जीवन भी उतना ही सक्रिय रहा। धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में उनकी सहभागिता रहती थी। वे मानते थे कि समाज की उन्नति केवल विचारों से नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागिता से होती है। जहाँ भी समाजहित का कोई कार्य होता, वे बिना किसी अपेक्षा के सहयोग देने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उनका सहज, सरल और आत्मीय व्यवहार उन्हें हर वर्ग का प्रिय बनाता था।

 

उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी विनम्रता थी। उन्होंने कभी सम्मान या प्रसिद्धि की आकांक्षा नहीं की। वे चुपचाप अपना कर्तव्य निभाने में विश्वास रखते थे। कठिन परिस्थितियों में भी उनका धैर्य, संतुलित सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट बनाता था। वे कम बोलते थे, किंतु उनकी प्रत्येक बात अनुभव, विवेक और जीवन-दर्शन से परिपूर्ण होती थी। उनके संपर्क में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति उनके व्यवहार और आत्मीयता से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था।

 

20 मई 2026 को उनके निधन से केवल एक परिवार ने अपना अभिभावक ही नहीं खोया, बल्कि संगरिया ने एक निष्पक्ष पत्रकार, समाज ने एक संवेदनशील नागरिक और पत्रकारिता जगत ने एक ऐसे कर्मयोगी को खो दिया, जिसने जीवनभर समाचारों को जनसेवा का माध्यम माना। उन्होंने सिद्ध किया कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, विश्वास और सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण निर्मित करना भी है।

 

आज वे हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, किंतु उनके विचार, उनके संस्कार, उनकी कार्यशैली और उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। सत्य, सादगी, संवेदनशीलता और जनसेवा का जो आदर्श उन्होंने अपने जीवन से स्थापित किया, वही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान और उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।

 

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

 

ॐ शांति

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