सांसद कुलदीप इंदौरा ने संसद में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में पोटाश भंडार के दोहन का मुद्दा उठाया और कहा कि पहचाने गए 17 ब्लॉकों में से केवल 2 की ही नीलामी हुई है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है।
सांसद कुलदीप इंदौरा ने संसद में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में पोटाश भंडार के दोहन का मुद्दा उठाया और कहा कि पहचाने गए 17 ब्लॉकों में से केवल 2 की ही नीलामी हुई है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है।
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के सांसद कुलदीप इंदौरा ने आज लोकसभा में पश्चिमी राजस्थान, खासकर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में मौजूद पोटाश खनिज के विशाल भंडार के दोहन का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की उदासीनता पर गंभीर सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि सरकार के अपने जवाब से यह साफ है कि पश्चिमी राजस्थान में पोटाश के विशाल भंडार की पहचान होने के बावजूद, इनके विकास के लिए ज़रूरी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। सरकार ने माना है कि हनुमानगढ़ जिले में 16 और श्रीगंगानगर जिले में 1 पोटाश ब्लॉक की पहचान की गई है, लेकिन अब तक हनुमानगढ़ में केवल दो ब्लॉकों की ही नीलामी हुई है। बाकी संभावित ब्लॉकों में से ज़्यादातर सालों से उपेक्षित पड़े हैं। सांसद ने कहा कि और भी चिंता की बात यह है कि पश्चिमी राजस्थान में विशाल भंडार होने के बावजूद, भारत अभी भी अपनी पोटाश खाद की लगभग 100% ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। सरकार द्वारा पहचाने गए खनिज ब्लॉकों की नीलामी और विकास की धीमी गति यह बताती है कि केंद्र सरकार इस रणनीतिक खनिज के दोहन और देश को पोटाश के मामले में आत्मनिर्भर बनाने को लेकर गंभीर नहीं है। श्री कुलदीप इंदौरा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजस्थान में पोटाश खाद के विशाल भंडार होने के बावजूद देश अभी भी इसके आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। अगर इन खनिज ब्लॉकों की समय पर नीलामी हो और खनन का काम शुरू हो, तो इससे न केवल देश की आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और राज्य व केंद्र सरकार दोनों के राजस्व में काफी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने जवाब में यह कहकर ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है कि नीलामी के बाद की प्रक्रिया व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility study) पर निर्भर करेगी। असलियत यह है कि पहचाने गए ज़्यादातर ब्लॉकों की तो नीलामी भी नहीं हुई है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार इस अहम राष्ट्रीय संसाधन के विकास को लेकर गंभीर नहीं है। सांसद इंदोरा ने मांग की कि पश्चिमी राजस्थान में चिन्हित सभी पोटाश ब्लॉकों की नीलामी जल्द पूरी की जाए, ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए और इस क्षेत्र में माइनिंग और मिनरल-आधारित उद्योग लगाने के लिए एक समय-सीमा वाला एक्शन प्लान बनाया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं, किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं का लाभ मिल सके।