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हनुमानगढ़ में धूमधाम से मना दशहरा महोत्सव

-राम-रावण युद्ध के मंचन और आतिशबाजी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया
हनुमानगढ़। टाउन स्थित दशहरा मैदान में इस वर्ष का दशहरा महोत्सव गुरुवार को भव्यता और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु और नागरिक इस ऐतिहासिक व धार्मिक आयोजन के साक्षी बने। मैदान खचाखच भरा हुआ था और वातावरण जय श्रीराम के नारों से गूंज रहा था। रावण दहन के इस पावन अवसर पर राम-रावण युद्ध का मंचन, रंगीन आतिशबाजी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को रोमांचित कर दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि विधायक गणेशराज बंसल, सभापति मंजू रणवां, उपसभापति सोनू बंसल रहे। मंच की अध्यक्षता रामलीला समिति अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल ने की।
रामलीला समिति के संरक्षक बालकृष्ण गोल्याण, सचिव दिनेश तलवाड़िया, कोषाध्यक्ष सतीश गर्ग, उपाध्यक्ष सज्जन बंसल डिंगवाला, डायरेक्टर प्रेम रत्न पारीक, उपडायरेक्टर अशोक मिड्ढा, सुंदर बंसल, प्रह्लाद गुप्ता, पवन खदरीया और सुरेंद्र तलवाड़िया ने अतिथियों का स्वागत पारंपरिक राजस्थानी पगड़ी पहनाकर, माल्यार्पण व स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान श्रीराम और रावण के युद्ध का मंचन रहा। मंझे हुए कलाकारों ने इस प्रसंग का ऐसा सजीव चित्रण किया कि पूरा स्टेडियम मंत्रमुग्ध हो गया। भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध का दृश्य देखते ही दर्शकों की तालियां गूंज उठीं और हर ओर से जय श्रीराम के नारे लगने लगे। मंचन के दौरान रामलीला की झांकियां भी प्रस्तुत की गईं, जिनसे धार्मिक वातावरण और प्रबल हो उठा।
उत्तर प्रदेश से आए विशेष कलाकारों द्वारा की गई रंगीन आतिशबाजी ने महोत्सव की शोभा कई गुना बढ़ा दी। आसमान में चमकते रंग-बिरंगे पटाखों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आतिशबाजी के हर दृश्य पर दर्शक रोमांचित हो उठे और बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने आनंद लिया। रावण दहन के साथ ही पूरे मैदान में उत्सव का माहौल चरम पर पहुंच गया।
दशहरा महोत्सव के दौरान विशेष रूप से रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतले तैयार करने वाले कारीगरों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने उनके परिश्रम और कला की सराहना की और माल्यार्पण व स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनंदन किया। इस सम्मान से कारीगरों के चेहरे गर्व और खुशी से खिल उठे।
स्टेडियम में उमड़ी भीड़ से यह साफ झलक रहा था कि हनुमानगढ़ के लोगों में दशहरे का उत्साह आज भी उतना ही प्रबल है। सुबह से ही लोग मैदान में पहुंचने लगे थे और शाम तक पूरा स्टेडियम खचाखच भर गया। बच्चों ने आतिशबाजी और रावण दहन का खूब आनंद लिया, वहीं महिलाओं और बुजुर्गों ने भी धार्मिक मंचन को बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से देखा।
रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें धर्म, सत्य और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। समाज में ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक आस्था प्रबल होती है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी सशक्त होती है। समिति ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि इस पर्व के संदेश को अपने जीवन में उतारकर सामाजिक सौहार्द और सद्भावना बनाए रखें।
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