धौलीपाल से पधारी सुश्री स्नेहा गोलछा की 11 दिवसीय तपस्या का तेरापंथ सभा भवन में भव्य अनुमोदन
-साध्वी सूरजप्रभा जी ठाणा-3 के सानिध्य में हुआ आध्यात्मिक आयोजन, समाज ने दी साधुवाद और प्रेरणा

हनुमानगढ़। तेरापंथ सभा भवन में रविवार को एक विशेष आध्यात्मिक माहौल उस समय बना जब धौलीपाल से पधारी सुश्री स्नेहा गोलछा की 11 दिन की तपस्या का भव्य अनुमोदन कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी सूरजप्रभा जी ठाणा-3 के सानिध्य में, नमस्कार महामंत्र के श्रवण के साथ हुई। मंगलाचरण का वाचन तेरापंथ महिला मंडल की बहनों द्वारा किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
सभा अध्यक्ष संजय बांठिया ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए तप की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तपस्या न केवल आत्मशुद्धि का मार्ग है, बल्कि यह समाज में अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक जागृति का भी प्रतीक है। तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा संतोष बांठिया और मंत्री डॉ. दीपिका जैन ने भी अपने विचार रखते हुए सुश्री गोलछा की तपस्या को प्रेरणादायक बताया।
धौलीपाल से पधारे राजकुमार बांठिया और कुलदीप नैण ने बताया कि साध्वी श्री जी का 33 दिन का धौलीपाल प्रवास समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। उसी प्रवास के प्रभाव से धौलीपाल में तपस्या का यह क्रम निरंतर आगे बढ़ रहा है। साध्वी डॉ. लावण्य यशा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि तपस्या से मनुष्य के बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के कर्मों का क्षय होता है और यह जीवन को सफल बनाने का सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने तपस्वी बहन को साधुवाद देते हुए श्रावक समाज से अधिक से अधिक तपस्या मार्ग अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में हनुमानगढ़ जंक्शन और धौलीपाल से बड़ी संख्या में श्रावक समाज के लोग उपस्थित हुए। मंच संचालन सभा मंत्री मनोज राखेचा ने किया। उन्होंने अपने नेतृत्व में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
तेरापंथ सभा हनुमानगढ़, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ उपसभा और धौलीपाल इकाई द्वारा तपस्वी बहन को अभिनंदन पत्र भेंट कर तप अनुमोदन किया गया। इस अवसर पर पूरे सभा भवन में आध्यात्मिक वातावरण, श्रद्धा और उमंग का संगम देखने को मिला। समाज ने इसे न केवल एक साधना का उत्सव बताया, बल्कि इसे जीवन के उच्च आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देने वाला ऐतिहासिक क्षण माना।


