किसान बोले- एथेनॉल फैक्ट्री हटने तक जारी रहेगा आंदोलन

टिकैत बोले- ट्रैक्टर के बंपर मजबूत रखो, अब 7 जनवरी को संगरिया में जुटेंगे
हनुमानगढ़। जंक्शन स्थित धान मंडी में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में आयोजित महापंचायत में किसानों ने भाजपा सरकार पर आम आदमी की जमीन, हवा और पानी छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने फैक्ट्री हटने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। बुधवार को आयोजित सभा को राकेश टिकैत, जोगेन्द्र सिंह आग्रोहा, पूर्व विधायक बलवान पूनिया, किसान नेता रेशम सिंह माणुका, मंगेज चौधरी, रायसाहब मल्लड़खेड़ा, रघुवीर वर्मा, जगजीत सिंह जग्गी, मदन दुर्गेसर, रवि जोसन, नितिन ढाका, बलजिंद्र सिंह, संदीप मान, मान सिंह, संदीप, गगनदीप, सुभाष गोदारा और रविंद्र सिंह ने संबोध्तिा किया।
वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने आंदोलनकारियों से ट्रैक्टर के बंपर मजबूत रखने को कहा। बोले- समय आने पर यही काम आएंगे। महापंचायत में राजस्थान के साथ पंजाब और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में किसान पहुंचे थे। हालांकि प्रशासन से 2 घंटे चली बातचीत के बाद आज की महापंचायत को संपन्न कर दिया गया है। अब 7 जनवरी को संगरिया में महापंचायत होगी।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि टिब्बी में ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की फैक्ट्री के मामले में कहा जा रहा है कि इससे विकास होगा, नौकरी मिलेगी। कहते हैं कि आप विकास का विरोध कर रहे हैं। उन्हें यही कहना है कि जहां फैक्ट्री लगेगी वहां जमीन, हवा और पानी दूषित होगा। फैक्ट्री शुरू हो गई तो प्रशासन को दूषित पानी दिखाते रहना। ये 14 फैक्ट्री के बराबर है। इसलिए टिब्बी की संघर्ष कमेटी जो फैसला लेगी, संयुक्त किसान मोर्चा उनके साथ है। उन्होंने कहा कि यूपी में ऐसा मामला हुआ। मुजफ्फरनगर में गुरुद्वारा की जमीन हाईवे के रास्ते में आ रही थी। वहां झंडा लगा दिया। सरकार को सड़क का रास्ता बदलना पड़ा। यहां भी झंडा गाड़ दो कि एक किलोमीटर के घेरे में जो ट्रक आएगा वो वापिस नहीं जाएगा। ट्रक नहीं आएगा तो फैक्ट्री का सामान कहां जाएगा।
प्रशासन 144 लगाता है तो किसान भी उससे दोगुनी धारा लगाएगा। अब फैसला संघर्ष समिति को लेना है। संयुक्त किसान मोर्चा संघर्ष कमेटी के साथ है। अभी तो बीज कानून के खिलाफ भी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। सरकार जमीन छीनना चाहती है। परिवारों को सरकार बांट रही है। इसके खिलाफ लड़ना है। यहां के कलेक्टर ने ट्रैक्टर को हथियार बताया, उनका धन्यवाद। मैं तो कहता हूं कि ट्रैक्टर के बंपर मजबूत रखो। आंदोलन में यही काम आएगा। प्रशासन भले ही रोके लेकिन जहां जाओ ट्रैक्टर लेकर जाओ। आंदोलन में तो ट्रैक्टर जरूर लेकर जाना।
जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव का संदेश लेकर सभा स्थल पर यूअरईटी श्रीगंगानगर के सचिव अशोक असीजा, सीनियर आरएएस अधिकारी भवानी सिंह पंवार, संगरिया एसडीएम जय कौशिक और टिब्बी एसडीएम सत्यनारायण सुथार महापंचायत स्थल पहुंचे और किसान नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलक्टर कार्यालय के लिए रवाना हुआ।
प्रशासन द्वारा बुलाई गई वार्ता में किसान नेता मंगेज चौधरी, रेशम सिंह माणुका, रघुवीर वर्मा, काका रोड़ीकपूरा, सुभाष मक्कासर, रविन्द्र सिंह सतीपुरा, गगनदीप सिंह, कुलदीप सिंह, संदीप कंग सहित अन्य सदस्य वार्ता में गये।
प्रशासन की ओर से एडीजी बीजू जॉर्ज जोसफ, शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर, आईजी हेमंत शर्मा, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, पूर्व जिला कलक्टर कानाराम, जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव, पुलिस अधीक्षक हरि शंकर, एडीएम उम्मेदीलाल मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वार्ता की शुरुआत में ही किसान प्रतिनिधियों ने अपनी दो प्रमुख मांगें स्पष्ट रूप से रख दीं। पहली, राठीखेड़ा में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के एमओयू को रद्द किया जाए। दूसरी, आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि किसानों की भावनाओं को देखते हुए फिलहाल एथेनॉल प्लांट का निर्माण कार्य एक बारगी रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले की जांच और समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे का निर्णय लेगी और किसान प्रतिनिधियों को उससे अवगत कराया जाएगा।
इस पर किसान नेताओं ने सरकार से तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझाने के बजाय जनभावनाओं को समझने की अपील की। किसानों का कहना था कि सिर्फ निर्माण कार्य रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एमओयू रद्द करने पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए। वहीं मुकदमे वापस लेने के मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है और इसके लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
किसान प्रतिनिधि इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। लंबी चर्चा के बाद यह सहमति बनी कि फिलहाल स्थानीय पुलिस को इन मामलों में दखल देने से रोका जाएगा, ताकि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही, इन मुकदमों की जांच सीआईडी सीबी को सौंपने पर दोनों पक्षों में सहमति बनी। इस तरह दोनों मांगों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
वार्ता के दौरान किसान नेताओं ने आपस में परामर्श करने की इच्छा जताई। इस पर प्रशासनिक अधिकारी सभागार से बाहर चले गए। कुछ देर बाद दूसरे दौर की वार्ता शुरू हुई। इसमें इस बात पर सहमति बनी कि जिला प्रशासन दोनों प्रमुख बिंदुओं, एमओयू रद्द करने और मुकदमे वापस लेने के मामले पर राज्य सरकार को शासकीय पत्र लिखेगा और लोकहित में निर्णय लेने का आग्रह करेगा।
इस सहमति के तुरंत बाद जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को शासकीय पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत कराया और उसकी प्रति किसान प्रतिनिधियों को सौंप दी। किसान प्रतिनिधि पत्र और सहमति की प्रति लेकर वापस महापंचायत स्थल पहुंचे। जब मंच से किसानों को वार्ता के नतीजों की जानकारी दी गई तो उपस्थित किसानों ने करतल ध्वनि के साथ इसे स्वीकार किया। इसके साथ ही धान मंडी में चल रही किसान महापंचायत समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।
हालांकि, किसानों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनका शांतिपूर्ण धरना टिब्बी में जारी रहेगा। किसान नेताओं ने प्रशासन और सरकार को दो टूक शब्दों में कहा कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। सरकार को 20 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में यदि किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 7 जनवरी को संगरिया में फिर से किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस तरह दिनभर चले तनाव, सुरक्षा और वार्ताओं के बीच किसान आंदोलन फिलहाल स्थगित हुआ, लेकिन मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और आने वाले 20 दिनों के फैसलों पर
टिकी हुई हैं।


