पंचम दिवस: गोवर्धन पूजा की महिमा और गौ-सेवा का संकल्प; भक्ति के रंग में रंगा सिरसा!
ऐलनाबाद, सिरसा 1 जनवरी( रमेश भार्गव) सिरसा (रानियां रोड): वीर महाराणा प्रताप नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिन श्रद्धा, उल्लास और ज्ञान की अद्भुत वर्षा हुई। कथा पांडाल उस समय गोकुल धाम बन गया जब भक्तों ने ‘नंदोत्सव’ और ‘गोवर्धन पूजन’ का आनंद लिया।
* प्रातःकालीन महायज्ञ और गृहस्थ जीवन का पाठ
दिन का शुभारंभ प्रातःकालीन गायत्री सामाजिक समरसता महायज्ञ से हुआ। इस अवसर पर यज्ञाचार्य दीदी श्रीजी ने वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए अनमोल सूत्र साझा किए:
आदर्श गृहस्थ: उन्होंने बताया कि वैवाहिक जीवन में शांति के लिए पति-पत्नी के बीच पारस्परिक आदर और सम्मान का भाव अनिवार्य है।
संस्कार: एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और धैर्य रखना ही सुखी परिवार का आधार है।
संयम और त्याग से ही घर ‘स्वर्ग’ बनता है।
वीरांगना सम्मान: गीता ज्ञान का प्रसार
सनातन संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए आज पुनः एक वीरांगना बालिका को श्रीमद् भगवत गीता भेंट कर सम्मानित किया गया। दीदी श्रीजी का लक्ष्य प्रत्येक बालिका को आत्मरक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न बनाना है। 📖 प्रतिज्ञा ली गई कि बेटियाँ ही धर्म की रक्षक बनेंगी।
नंदोत्सव और गोवर्धन पूजन:
झूम उठे श्रद्धालु
कथा के दौरान जब भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजन का प्रसंग आया, तो पूरा वातावरण ‘जय कन्हैया लाल की’ के नारों से गूँज उठा।
दिव्य झाँकी: भगवान को 56 भोग लगाए गए और गोवर्धन पर्वत की भव्य झाँकी सजाई गई।
भक्ति नृत्य: मधुर भजनों पर सभी भक्तों ने भाव-विभोर होकर झूम-झूम कर नृत्य किया। ऐसा लग रहा था मानो साक्षात ब्रज भूमि सिरसा में उतर आई हो।
* गौ-सेवा ही सर्वोपरि: मुख्य अतिथि का उद्बोधन
आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमान ललित जी जैन (संस्थापक, जयदेव सहदेव चैरिटेबल ट्रस्ट) उपस्थित रहे। उन्होंने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
गौ-महिमा: अपने संबोधन में ललित जी ने गौ माता के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गौ-सेवा के बिना सनातन धर्म की कल्पना अधूरी है और हर घर से पहली रोटी गौ माता के लिए निकलनी चाहिए।
* मुख्य आकर्षण:
56 भोग दर्शन: भगवान को अर्पित किए गए विविध व्यंजनों के दर्शन।
पारिवारिक शिक्षा: सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आध्यात्मिक टिप्स।
समरसता का भाव: महायज्ञ में समाज के हर तबके की भागीदारी।


