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शिक्षा की नई रोशनी: सीडब्लूसी अध्यक्ष जितेंद्र गोयल ने छोटे‑छोटे बच्चों को जागरूक कर शिक्षा के पथ पर लाने का संकल्प लिया

रावतसर सीडब्लूसी (चाइल्ड वेल‑फेयर कमिशन) के जिला अध्यक्ष जितेंद्र गोयल ने रावतसर क्षेत्र में एक व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे‑छोटे बच्चों को शिक्षा के महत्व से परिचित कराना और उन्हें पाठ्य‑सामग्री उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत, गोयल ने कहा कि “जब तक बच्चा भीख माँगता रहेगा, तब तक हमारा समाज विकास नहीं कर सकता।” इसी विचारधारा के साथ, भीख मांगने वाले बच्चों को पाबंद करने के लिए स्थानीय पुलिस और सामाजिक संगठनों के सहयोग से विशेष कार्रवाई शुरू की गई है।

पाठ्य‑सामग्री वितरण और जागरूकता

जिला भर में पाँच हजार से अधिक किताबें, नोटबुक और स्टेशनरी किट्स सरकारी तथा निजी स्कूलों में वितरित की जा रही हैं। जितेंद्र गोयल ने बताया कि इस वितरण का लक्ष्य उन बच्चों को समर्थन देना है, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण स्कूल नहीं जा पाते थे। साथ ही, ग्रामीण स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित कर अभिभावकों को शिक्षा के दीर्घकालिक लाभों के बारे में समझाया जा रहा है।
भीख‑मांगने पर प्रतिबंध

सीडब्लूसी ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर रावतसर के प्रमुख बाजारों और रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें तुरंत स्कूल में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। उल्लंघन करने वाले परिजनों को कड़ी चेतावनी के साथ कानूनी कार्रवाई की भी सूचना दी गई है।

ईंट‑भट्टों पर प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षाप्रद खिलौने

हनुमानगढ़ जिले के विभिन्न ईंट‑भट्टों में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा की ओर आकर्षित करने के लिए एक नई योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत, जनवरी 2026 से प्रत्येक भट्टी के पास शिक्षाप्रद खिलौने वितरित किए जाएंगे, जिससे बच्चे खेल‑खेल में गणित, विज्ञान और भाषा की बुनियादी अवधारणाओं को सीख सकें। गोयल ने कहा, “हम चाहते हैं कि बच्चा भट्टी की धूल में नहीं, बल्कि ज्ञान की रोशनी में खेलता रहे। समुदाय की भागीदारी
इस व्यापक पहल में स्थानीय व्यापारियों, धार्मिक संस्थानों और स्वयंसेवी समूहों ने भी सक्रिय सहयोग दिया है। कई दुकानदारों ने शिक्षा‑सपोर्ट कार्ड वितरित किए हैं, जिससे बच्चों को स्कूल की फीस और सामग्री में छूट मिल सके। भविष्य की दिशा। सीडब्लूसी ने अगले शैक्षणिक वर्ष में पूरे हनुमानगढ़ जिले में डिजिटल लैब स्थापित करने, शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित करने और नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है। इन प्रयासों से उम्मीद की जा रही है कि भीख‑मांगने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी और हर बच्चा स्कूल की बेंच पर अपनी जगह बना लेगा।

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