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रेल बाईपास के विरोध में फिर भड़का आनंद विहार ढिल्लो कॉलोनी का आक्रोश

-मुआवजा लेने से इनकार, उच्च न्यायालय का हवाला देकर आंदोलन उग्र करने की चेतावनी
हनुमानगढ़। आनंद विहार ढिल्लो कॉलोनी से प्रस्तावित रेल बाईपास को लेकर पिछले माह से शांत पड़ा विवाद गुरुवार को एक बार फिर गरमा गया। प्रशासनिक अधिकारियों के कॉलोनी क्षेत्र में पहुंचते ही स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया और उन्होंने दो टूक शब्दों में मुआवजा लेने से इनकार कर दिया। लोगों का कहना है कि यह रेल बाईपास लगभग तीन हजार की आबादी वाली रिहायशी कॉलोनी को दो हिस्सों में बांट देगा, जिससे आमजन की दिनचर्या के साथ-साथ आपातकालीन जैसे एम्बुलेंस, फायर बिग्रेड़, शव यात्रा, सिलेण्डर वाली ट्राली, बस सहित अन्य सुविधाओं से वंचित रह जायेगा।
गुरुवार को उपखण्ड अधिकारी मांगीलाल सुथार, तहसीलदार हरीश सारण एवं डीवाईएसपी मीनाक्षी आनंद विहार ढिल्लो कॉलोनी के समीप पहुंचे और प्रभावितों को मुआवजा लेने के लिए समझाइश करने का प्रयास किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी एकत्र हो गए और उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्थिति में मुआवजा स्वीकार नहीं करेंगे। स्थानीय लोगों ने कहा कि रेल बाईपास बनने से कॉलोनी दो भागों में बंट जाएगी, बड़े वाहनों का प्रवेश बाधित होगा और एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड जैसी आवश्यक सेवाएं समय पर कॉलोनी में नहीं पहुंच पाएंगी। इससे हजारों लोगों की जान-माल की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
मौके पर पहुंचे पार्षद प्रतिनिधि सागर गुर्जर एवं विजय पेशवानी के नेतृत्व में लोगों ने रेल प्रशासन और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को मौके की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। लोगों ने प्रशासन पर बिना स्थानीय सहमति के जबरदस्ती निर्णय थोपने का आरोप लगाया।
पार्षद प्रतिनिधि सागर गुर्जर ने कहा कि करीब तीन माह पूर्व वार्डवासियों ने बड़े स्तर पर आंदोलन किया था, जिसके बाद मजबूर होकर उन्हें उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। वर्तमान में यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और आगामी सुनवाई 5 जनवरी को निर्धारित है। ऐसे में न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बिना प्रशासन द्वारा कॉलोनी में आकर मुआवजा लेने का दबाव बनाना और लोगों को बरगलाने का प्रयास करना पूरी तरह अनुचित है। इससे आमजन में भय और असमंजस का माहौल बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन “ऊंट के मुंह में जीरा” के समान मामूली मुआवजा देकर हजारों लोगों के घरों की छत उनसे जुदा करना चाहता है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सागर गुर्जर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से लोगों की बात नहीं सुनी तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो पूर्व की तरह बड़े कदम उठाते हुए रेल रोकने जैसे आंदोलनात्मक कार्यक्रम भी किए जाएंगे।
धरना-प्रदर्शन के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। लोगों ने एक स्वर में कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास जो रिहायशी कॉलोनी को तोड़ दे और लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करे, उसे स्वीकाऐर नहीं किया जा सकता।

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