ऐलनाबाद , 07 मार्च( रमेश भार्गव )केंद्रीय कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि नामधारी समाज की परंपराएं देशभक्ति, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक मूल्यों का अद्भुत संगम हैं। नामधारी समाज का इतिहास त्याग, बलिदान और संघर्ष से भरा हुआ है और यह भारत के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को रानियां क्षेत्र के गांव मस्तानगढ़ में आयोजित होला महल्ला पर्व में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस अवसर पर हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि इस पवित्र अवसर पर यहां आकर उन्हें अत्यंत सौभाग्य का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने होली के पर्व को एक नई परंपरा के रूप में ‘होला मोहल्ला’ के रूप में स्थापित किया था। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि वीरता, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नामधारी समाज ने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। गौ-वध के विरोध, शिक्षा के प्रसार, नशा मुक्ति अभियान और समाज सेवा के कार्यों में इस समाज की भूमिका सराहनीय रही है। कोरोना महामारी, भूकंप, बाढ़ और अन्य आपदाओं के समय भी नामधारी समाज ने आगे बढक़र सेवा कार्य किए हैं।
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने सिख इतिहास के वीर बालकों की स्मृति में हर वर्ष वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया है, ताकि उनके साहस और बलिदान को आने वाली पीढिय़ां याद रखें। उन्होंने नामधारी समुदाय के सतगुरु उदय सिंह जी को नमन करते हुए सभी श्रद्धालुओं को पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी और देश में एकता सद्भावना तथा आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सिख समाज के सम्मान और उनके योगदान को मुख्य धारा में लाने के लिए लगातार कार्य कर रही है, वहीं सतगुरु उदय सिंह जी ने कहा कि गुरु व अवतार किसी एक समुदाय के नहीं होते बल्कि पूरे संसार के लिए होते हैं उन्होंने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी का सबसे बड़ा योगदान महिलाओं के लिए सम्मान और अधिकारों के लिए रहा उस समय समाज में कन्या हत्या जैसी कुरीतियां प्रचलित थी और बच्चियों को जन्म लेते ही मार दिया जाता था या उन्हें पैसों के लिए बेच दिया जाता था सतगुरु राम सिंह जी ने ऐसी कुरितियों का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट कहा था कि जो व्यक्ति बच्ची को मारेगा या बेचेगा उसे संगत में स्थान नहीं दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि उस दौर में विधवाओं को बेहद कठिन और अपमानजनक जीवन जीना पड़ता था इस कुरीति को समाप्त करने के लिए सतगुरु राम सिंह जी ने विधवा विवाह की परंपरा को फिर से शुरू किया और महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाया उन्होंने महिलाओं को अमृत पान करने की भी परंपरा शुरू की जिससे उन्हें पुरुषों के सम्मान धार्मिक अधिकार मिले उन्होंने कहा कि सत्गुरुओं की शिक्षा यही है कि सभी लोग आपसी प्रेम भाईचारे और समानता के साथ रहे यदि हम अपने अधिकारों का थोड़ा त्याग कर दूसरों के अधिकारों की रक्षा करें तो समाज के अधिकांश विवाद समाप्त हो सकते हैं वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली ने कहा कि नामधारी समुदाय और अन्य संतों ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

