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किसान मेले में किसानों को जागरूक कर उन्नत कपास प्रबंधन तकनीकों की दी गई जानकारी

हनुमानगढ़। उत्तरी क्षेत्र परियोजना के अंतर्गत जिला हनुमानगढ़ के चक हीरासिंहवाला गांव में गुरुवार को एक किसान मेला एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कपास फसल में गंभीर कीट गुलाबी सुंडी की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्मार्ट ट्रैप के उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने गुलाबी सुंडी के प्रभावी प्रबंधन के लिए मेटिंग डिसरप्शन तकनीक CREMIT-PBW के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। किसानों को बताया गया कि इस तकनीक के उपयोग से कीट के प्रजनन चक्र को बाधित कर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों ने किसानों को कपास की समग्र फसल प्रबंधन तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिसमें ऑफ-सीजन प्रबंधन, बॉल रॉट, सफेद मक्खी, सूटी मोल्ड तथा पोषक तत्वों की कमी की पहचान एवं समाधान शामिल रहे। किसानों को उच्च उत्पादन के लिए ऐसी BG-II हाइब्रिड किस्मों के चयन की सलाह दी गई, जो कपास लीफ कर्ल वायरस रोग एवं रस चूसने वाले कीटों के प्रति सहनशील हों।

कार्यक्रम में 350 से अधिक किसानों एवं कृषि वैज्ञानिक ने सक्रिय भागीदारी की। इस अवसर पर डॉ. एस. के. सैन प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग विज्ञान, आईसीएआर-सीआईसीआर, सिरसा), डॉ. अनूप कुमार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, संगरिया, डॉ. अमरप्रीत सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान, डॉ. उमेश कुमार विषय विशेषज्ञ, कीट विज्ञान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों की समस्याओं का समाधान किया गया। इस प्रकार के कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर कपास उत्पादन में वृद्धि और कीट प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

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