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केंद्र की भाजपा सरकार ने साजिश के तहत बीबीएमबी के संशोधित नियम को किया लागू: चौधरी अभय सिंह चौटाला 

ऐलनाबाद yt( रमेश भार्गव ) इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने बीबीएमबी में हरियाणा के अधिकारियों को हिस्सेदारी ख़त्म करने की साजिश को अम्लिजामा पहना दिया है। केंद्र की सरकार ने बीबीएमबी के नियमों में जो संशोधन किए थे उनको मंगलवार से लागू कर दिया है। हमने पहले भी जब बीबीएमबी के नियमों में संशोधन किए थे तब भी इसका पुरजोर विरोध किया था।

अभय सिंह चौटाला ने कहा कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के नियमों में केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा किए गए हालिया संशोधन (14 अप्रैल 2026 को अधिसूचित) से हरियाणा को मुख्य नुकसान यह है कि बोर्ड के सबसे महत्वपूर्ण पद मेंबर (सिंचाई) पर हरियाणा के अधिकारियों की अनिवार्य/गारंटीड प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है।

पहले के नियम 1974 के तहत मेंबर (सिंचाई) का पद हमेशा हरियाणा कैडर के अधिकारी को दिया जाता था। यह परंपरा भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं के जल व बिजली प्रबंधन में हरियाणा के हितों की सीधी सुरक्षा करती थी। लेकिन अब नए नियम के तहत दोनों (मेंबर सिंचाई और मेंबर पावर पंजाब से ) पूरे भारत के अधिकारियों के लिए खोल दिए गए हैं। न्यूनतम योग्यता बहुत सख्त कर दी गई है। 20 साल का अनुभव, चीफ इंजीनियर स्तर का पद, और पिछले 10 साल में कम से कम 5 साल प्रमुख सिंचाई प्रणालियाँ या विद्युत अवसंरचना में। अगर उपयुक्त हरियाणा का अधिकारी नहीं मिला तो दूसरे राज्य या केंद्र के अधिकारी लगाए जाएँगे।

नए नियम लागू होने के बाद बोर्ड में हरियाणा का प्रभाव और वोटिंग पावर खत्म हो जाएगा। मेंबर (सिंचाई) बोर्ड की बैठकों में हरियाणा के सिंचाई हितों (भाखड़ा मुख्य नहर से पानी की निकासी, रिजर्वायर स्तर, सूखे/बाढ़ की स्थिति) की पैरवी करता था। अब अगर गैर-हरियाणा अधिकारी आ गया तो हरियाणा के हितों की अनदेखी का खतरा बढ़ जाएगा। जल प्रबंधन पर केंद्र का अधिक नियंत्रण होगा। क्यूंकि बीबीएमबी पानी और बिजली का मासिक/साप्ताहिक वितरण तय करता है ऐसे में अगर ग़ैर बीजेपी सरकार हरियाणा में बनती है तो बीजेपी उस सरकार को नुक़सान पहुँचाने की मानसिकता से हरियाणा के पानी में कटौती करेगी। हरियाणा कृषि-प्रधान राज्य है और भाखड़ा-ब्यास से मिलने वाला पानी उसकी सिंचाई का मुख्य स्रोत है। प्रतिनिधित्व कम होने से केंद्र/अन्य राज्यों के हित ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। सबसे बड़ा नुकसान प्रशासनिक नियंत्रण का है जिसके ख़त्म होने के बाद बीबीएमबी पर हरियाणा का दावा पूरी तरह से शून्य हो जाएगा।

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