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समुद्र मंथन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों से भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

हनुमानगढ़। जंक्शन स्थित जाट भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य आचार्य श्री देवीदान जी गौश्री ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में समुद्र मंथन और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व व्यापारी नेता सुरेंद्र बलाड़िया एवं भाजपा नेता अमित चौधरी ने सपत्नीक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्यासपीठ का पूजन किया और कथा के सफल आयोजन की मंगलकामना की।
आचार्य श्री ने समुद्र मंथन के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से अनेक दिव्य रत्नों की प्राप्ति हुई। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीवन में सफलता, अमृत रूपी ज्ञान और सुख की प्राप्ति के लिए धैर्य, परिश्रम और संयम आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से पहले विष निकला, उसी प्रकार जीवन में भी कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जो व्यक्ति धैर्य और विश्वास बनाए रखता है, अंततः उसे सफलता और सुख की प्राप्ति होती है।
इसके बाद आचार्य श्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संकल्प लिया। उन्होंने देवकी और वसुदेव की कारागार में श्रीकृष्ण के प्राकट्य तथा वसुदेव द्वारा यमुना नदी पार कर बालकृष्ण को गोकुल पहुंचाने के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया। रंग-बिरंगी सजावट, फूलों और मनमोहक झांकियों ने पूरे पंडाल को वृंदावन जैसा स्वरूप प्रदान कर दिया। जैसे ही आचार्य श्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा की, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन पर नृत्य कर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आचार्य श्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, धर्म और कर्म का संदेश देता है। यदि मनुष्य उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए तो समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिकता का वातावरण स्थापित हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के नाम का स्मरण करने और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। आयोजन समिति ने बताया कि कथा का समापन 5 जुलाई को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ एवं पूर्णाहुति के साथ होगा। समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण की अमृतमयी कथाओं का श्रवण करने और धार्मिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की।
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