– आईएमए ने जिला कलक्टर को सौंपा ज्ञापन, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रशासनिक सुधारों पर दिया जोर
हनुमानगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हनुमानगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष डॉ. एस.एस. गेट के नेतृत्व में जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर निजी अस्पतालों से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक एवं नियामकीय मुद्दों के समाधान की मांग की। ज्ञापन में विशेष रूप से राजस्थान सरकार की गाइडलाइन के अनुसार फायर एनओसी की पांच वर्ष की वैधता का प्रभावी पालन करवाने तथा क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के तहत अस्थायी व्यवस्था के स्थान पर स्थायी पंजीकरण प्रणाली लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
आईएमए अध्यक्ष डॉ एसएस गेट ने कहा कि चिकित्सा जगत हमेशा सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और जनहित कार्यक्रमों में सक्रिय सहयोग करता रहा है। ऐसे में अस्पतालों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल एवं व्यावहारिक बनाया जाना आवश्यक है, ताकि चिकित्सक अनावश्यक औपचारिकताओं के बजाय मरीजों की बेहतर चिकित्सा सेवाओं पर अधिक ध्यान दे सकें।
ज्ञापन में कहा गया कि राजस्थान सरकार द्वारा फायर एनओसी की वैधता पांच वर्ष निर्धारित किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर हर वर्ष नवीनीकरण या दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे अस्पताल संचालकों पर अनावश्यक प्रशासनिक और आर्थिक बोझ पड़ता है। आईएमए ने मांग की कि सरकार की निर्धारित पांच वर्षीय वैधता का जिले में समान रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
इसके साथ ही क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के अंतर्गत अस्थायी पंजीकरण व्यवस्था के स्थान पर स्थायी व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि बार-बार एक ही प्रकार के दस्तावेज जमा कराने की प्रक्रिया को सरल और तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।
ज्ञापन में स्टेट आईएमए अध्यक्ष डॉ एमपी शर्मा ने कहा कि एबीडीएम स्पाइरल्स हेल्थ सॉफ्टवेयर से जुड़ी कुछ तकनीकी समस्याओं के समयबद्ध समाधान की आवश्यकता भी जताई गई। साथ ही सॉफ्टवेयर कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा चिकित्सकों के साथ सम्मानजनक एवं पेशेवर व्यवहार बनाए रखने की अपेक्षा व्यक्त करते हुए प्रशासन से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया।
आईएमए ने जिला प्रशासन, सीएमएचओ कार्यालय, एबीडीएम अधिकारियों, संबंधित सॉफ्टवेयर कंपनी और आईएमए प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आयोजित कर सभी लंबित विषयों का समाधान निकालने की मांग की। संगठन ने विश्वास जताया कि प्रशासन के सकारात्मक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन और अधिक सुचारू होगा तथा चिकित्सकों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
इस दौरान अध्यक्ष डॉ. एस.एस. गेट, डॉ. एम.पी. शर्मा, डॉ. भवानी सिंह ऐरन, सचिव डॉ. अर्जुन सिंह राठौड़, डॉ. पारस जैन, डॉ. महेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. मदन सिंह, डॉ. निशांत बतरा, डॉ. आदित्य चावला, डॉ. विक्रम जैन, डॉ. भूपेंद्र नारंग, डॉ. मदन पारीक, डॉ. आभास हिसारिया, डॉ. विजय सोनी, डॉ. रजत पारीक, डॉ. वी.एस. तिवारी, डॉ. जितेंद्र अग्रवाल, डॉ. भूपेंद्र नारंग, डॉ. धर्मेंद्र रोझ, डॉ. संदीप भाकर, डॉ. नरेश सकलेचा, डॉ. भाल सिंह सहित आईएमए के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

