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स्वास्थ्य विभाग ने बांटे ओआरएस पैकेट, किया आमजन को गर्मी से बचाव के लिए जागरूक भीषण गर्मी जारी, आमजन बरतें एहतियात, लू-तापघात से बचाव बेहद जरूरी

श्रीगंगानगर, 12 जून। जिले में अत्यधिक गर्मी के चलते जिला प्रशासन ने आमजन से विशेष एहतियात बरतने की अपील की है। गर्मी से बचाव हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, नगरीय निकाय सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्मी से बचाव के लिये स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर टीमें लगाकर ओआरएस वितरण करते हुए आमजन को जागरूक किया जा रहा है।


जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बताया कि इन दिनों जिले में भीषण गर्मी का दौर जारी है और इस समय आमजन को गर्मी से बचाव के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है। वर्तमान में क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी और लू से बचाव के लिये चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों को गर्मी से बचाव हेतु आवश्यक कार्यवाही के लिये निर्देशित किया गया है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में लू और तापघात से बचाव के लिये पर्याप्त इंतजाम और दवा सहित अन्य उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।उन्होंने बताया कि नगरपरिषद और नगरीय निकायों के साथ-साथ जिला परिषद को निर्देशित किया गया है कि मनरेगा कार्यस्थल पर पेयजल, छाया सहित अन्य व्यवस्थाएं की जायें। चिकित्सा संस्थानों में बिजली और पेयजल सहित पर्याप्त दवाएं रखने के लिये भी निर्देशित किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी अस्पतालों में रोगियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, संस्थान में रोगी के उपचार के लिए आपातकालीन किट में ओआरएस, ड्रिपसेट सहित अन्य आवश्यक दवाइयां रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन दिनों ओआरएस वितरण करते हुए आमजन को जागरूक करने में जुटी हैं। विभाग ने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं धानमंडी जैसे प्रमुख आवाजाही वाले स्थलों पर विशेष टीमें नियुक्त की हैं, जिनके द्वारा दोपहर 12 से सायं 4 बजे तक ओआरएस पैकेट वितरित करते हुए आमजन को गर्मी से बचाव हेतु जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शरीर में लवण व पानी अपर्याप्त होने पर विषम गर्म वातावरण में लू व तापघात से सिर का भारीपन व अत्यधिक सिरदर्द होने लगता है। इसके अलावा अधिक प्यास लगना, शरीर में भारीपन के साथ थकावट, जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढऩा, पसीना आना बंद होना, मुंह का लाल हो जाना, त्वचा का सूखा होना, अत्यधिक प्यास का लगना व बेहोशी जैसी स्थिति का होना आदि लक्षण आने लगते हैं। चिकित्सकीय दृष्टि से लू-तापघात के लक्षण, लवण व पानी की आवश्यकता व अनुपात विकृति के कारण होती है।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी और लू की वजह से मस्तिष्क का एक केन्द्र जो मानव के तापमान को सामान्य बनाए रखता है, काम करना छोड़ देता है। ऐसे में रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपड़े ढीले कर लेटा दिया जावे। रोगी को होश मे आने की दशा मे उसे ठण्डा पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल, कच्चा आमपना दें। यदि उक्त सावधानी के बाद भी मरीज ठीक नहीं होता है, तो उसे तत्काल निकट की चिकित्सा संस्थान ले जाया जाए। स्वास्थ्य संबंधी जरूरत होने पर तत्काल 108 को कॉल करें या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर जाएं।
उन्होंने बताया कि जहां तक सम्भव हो धूप में न निकलें, धूप में शरीर पूर्ण तरह से ढका हो। धूप में बाहर जाते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के ढीले व सूती कपड़ों का उपयोग करें। बहुत अधिक भीड़ व गर्म घुटन भरे कमरों से बचें। बिना भोजन किए बाहर न निकलें। गर्दन के पिछले भाग कान एवं सिर को गमछे या तौलिये से ढक कर ही जरूरी होने पर बाहर निकलें। रंगीन चश्में एवं छतरी का प्रयोग करें। गर्मी मे हमेशा पानी अधिक मात्रा मे पिएं एवं पेय पदार्थो जैसे नींबू पानी, नारियल पानी, ज्यूस आदि का प्रयोग करें। लू तापघात से प्राय हाईरिस्क श्रेणी वाले लोग जैसे कि कुपोषित बच्चे, वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं व शुगर, बीपी आदि के मरीज शीघ्र प्रभावित होते हैं।

 

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