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अधिवक्ता पर हमले से भड़का आक्रोश

 हनुमानगढ़। जंक्शन थाना क्षेत्र में रविवार सुबह अधिवक्ता लोकेन्द्र थौरी पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की सुस्ती और 30 घंटे तक कार्रवाई न होने से अधिवक्ता समाज में भारी आक्रोश फैल गया। सोमवार को बार संघ हनुमानगढ़ ने जंक्शन पुलिस थाना पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए थाने में धरना लगाया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिवक्ता लोकेन्द्र पुत्र मदनलाल थौरी (उम्र 32 वर्ष, निवासी वार्ड संख्या 8, जोड्किया) प्रतिदिन की भांति 14 सितंबर की सुबह 6 बजे टहलने निकले थे। इसी दौरान रामकुमार थौरी पुत्र कृष्णलाल थौरी व उसके चार अज्ञात साथी, जो धारदार सब्बल से लैस थे, ने लोकेन्द्र पर हमला कर दिया। हमलावरों ने अधिवक्ता को जमीन पर गिराकर दोनों पैरों पर कई वार किए और कहा कि इसे जिंदा नहीं छोड़ना है। शोर सुनकर पीड़ित के पिता व भाई मौके पर पहुंचे तो आरोपी मौके से फरार हो गए। गंभीर घायल लोकेन्द्र को परिजनों ने तत्काल जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया।
घायल अधिवक्ता ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि रामकुमार थौरी पुरानी रंजिश के चलते हमला करने आया था। अधिवक्ता समाज का आरोप है कि गंभीर मामला होने के बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर केवल एएसआई स्तर के अधिकारी को जांच सौंप दी, जिसने न तो अधिवक्ताओं से संपर्क किया और न ही कोई ठोस कदम उठाए।
सोमवार को बार संघ अध्यक्ष नरेंद्र माली के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता थाने पहुंचे और पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए थाने में धरना दिया। इस दौरान माली ने कहा कि बाहर से आए अधिवक्ताओं पर हमला होना गंभीर अपराध है, लेकिन पुलिस ने केवल औपचारिकता निभाई है।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे कार्य बहिष्कार (वर्क सस्पेंड) कर देंगे और आंदोलन को उग्र रूप देंगे। उनका कहना था कि अधिवक्ताओं पर हमले को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धरने के दौरान डीवाईएसपी मीनाक्षी ने अधिवक्ताओं से थाना परिसर में वार्ता की। बार संघ अध्यक्ष नरेंद्र माली ने मांग रखी कि मामले की जांच उच्च अधिकारी से करवाई जाए और 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
बार संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
अधिवक्ता समाज ने प्रशासन को जिम्मेदारी का अहसास कराने के लिए एकजुटता दिखाई और कहा कि अधिवक्ता न्याय दिलाने का कार्य करता है, उस पर हमला लोकतंत्र के स्तंभ पर हमला है। इस घटना से अधिवक्ता समाज में गहरा असंतोष है और पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया जा रहा है।
धरना 2 घंटे तक चला और अधिवक्ताओं ने दोहराया कि यदि त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में न्यायालयीन कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। इस मौके पर अध्यक्ष नरेंद्र माली, कोषाध्यक्ष राजीव शर्मा , सचिव प्रकाश रोझ , जितेंद्र सारस्वत, रघुवीर वर्मा, पूर्व कोषाध्यक्ष मोहित कुमार, राजेन्द्र पारीक, पवन स्वामी, अमन स्वामी, पुस्तकालय अध्यक्ष लोकेश शर्मा, सुनील चिलाना, राजेन्द्र बेनीवाल, जोधा सिंह, अनुज डोडा, नरेंद्र शर्मा, सुनील चाहर, आनंद मोदी सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।

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