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टिब्बी एथनॉल फैक्ट्री विवाद ने पकड़ा उबाल, सीएम भजनलाल शर्मा का पुतला फूंककर माकपा ने जताया जोरदार विरोध

- एक वर्ष से चल रहे किसान आंदोलन को पुलिस द्वारा खदेड़े जाने पर उग्र हुआ मामला, जिला मुख्यालय पर माकपा ने सरकार की ‘तानाशाही नीति’ बताकर किया तीखा प्रहार

हनुमानगढ़। टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथनॉल फैक्ट्री को लेकर पिछले एक वर्ष से किसान व आमजन लगातार विरोध जता रहे हैं। लंबे समय से चल रहे इस सतत आंदोलन ने मंगलवार को नया मोड़ तब ले लिया, जब भारी पुलिस जाप्ते ने टिब्बी में धरने पर बैठे किसानों और स्थानीय नागरिकों को तितर-बितर कर दिया। इसके बाद बुधवार को विरोध की चिंगारी और भड़क उठी तथा जिला मुख्यालय पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (माकपा) के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पुतला फूंककर जोरदार प्रदर्शन किया। नारेबाजी के बीच प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य रामेश्वर वर्मा ने कहा कि टिब्बी में लगाई जा रही एथनॉल फैक्ट्री स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त दूषित पानी भू-जल प्रदूषण और जनस्वास्थ्य संकट का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा भी केमिकल युक्त डिस्चार्ज के खतरों को लेकर कई बार चेताया जा चुका है, लेकिन सरकार जनमत को दरकिनार कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। वर्मा ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य विकास का विरोध नहीं, बल्कि जनजीवन की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण है।
जिला सचिव मंडल सदस्य शेर सिंह शाक्य ने कहा कि पहले पंजाब क्षेत्र से आने वाला केमिकल युक्त पानी हनुमानगढ़ की जमीन, हवा और पानी को लंबे समय से बर्बाद कर रहा है। अब उसी तरह के खतरे को बढ़ाते हुए टिब्बी में एथनॉल फैक्ट्री स्थापित कर लोगों के जीवन से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। शाक्य ने बताया कि किसान और आमजन पिछले एक वर्ष से शांतिपूर्वक धरना देकर विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन मंगलवार को पुलिस द्वारा जबरन धरना स्थल खाली करवाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे ‘संविधान विरोधी कार्रवाई’ करार देते हुए कहा कि सरकार जनता की आवाज दबाने के बजाय समस्याओं का समाधान ढूंढने की दिशा में कदम उठाए।


महिला नेत्री चंद्रकला वर्मा ने भी सरकार और प्रशासन पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करना किसी भी चुनी हुई सरकार का पहला कर्तव्य होता है, परंतु वर्तमान सरकार अपने स्वार्थ और उद्योगपतियों के हित साधने में जुटी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि दूषित पानी और प्रदूषण का सीधा असर घरेलू जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो महिलाओं की बड़ी भूमिका के साथ आंदोलन और भी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पुतला जलाया और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि भारी विरोध के बावजूद फैक्ट्री कार्य आगे बढ़ाया गया तो आंदोलन को और तीखा किया जाएगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यह संघर्ष अब केवल एथनॉल फैक्ट्री का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित की रक्षा का है। माकपा नेताओं ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, परंतु आवश्यक हुआ तो उग्र रूप भी धारण करेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
जिला मुख्यालय पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में बहादुर सिंह चौहान, बसन्त सिंह, रिछपाल सिंह, मुकद्दर अली, सुल्तान खान, दारा सिंह, वेद मक्कासर, भोला सिंह, अरविंद मुंशी, पप्पू सिंघ, सुरेंदर शर्मा, गुरुप्रेम सिंह, रामस्वरूप बागड़ी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, किसान, महिलाएं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल टिब्बी की नहीं है, बल्कि पूरे जिले और भविष्य की पीढ़ियों के हितों की रक्षा का प्रश्न है। प्रदर्शन के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एथनॉल फैक्ट्री परियोजना का पुनर्मूल्यांकन और पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र जांच तक आंदोलन जारी रहेगा।

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