हड्डारोड़ी भूमि विवाद पर अमरपुरा थेड़ी में उग्र विरोध
-सरपंच पर आरक्षित भूमि को निजी नाम करवाने का आरोप, ग्रामीणों ने पंचायत कार्यालय पर की तालाबंदी

हनुमानगढ़। ग्राम पंचायत अमरपुरा थेड़ी में हड्डारोड़ी (मृत पशु निस्तारण स्थल) को लेकर रविवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। ग्रामवासियों ने पंचायत कार्यालय के समक्ष तालाबंदी कर जोरदार नारेबाजी करते हुए सरपंच रोहित स्वामी और ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) शिवानी शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच और सचिव ने आपसी मिलीभगत से हड्डारोड़ी के लिए आरक्षित भूमि को आबादी भूमि में तब्दील कर, उसे अपने परिवार के नाम दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के पास हड्डारोड़ी के लिए करीब 2 बीघा भूमि बरसों से आरक्षित है। यह भूमि गांव बसने के समय से ही मृत पशुओं को गिराने हेतु उपयोग में ली जाती रही है। वर्ष 2006 में ग्राम पंचायत ने इसे विधिवत रूप से आरक्षित भी करवा दिया था, जो पंथर नंबर 160/267 मुन 29, किला नंबर 4 व 5 में दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार यह भूमि सार्वजनिक उपयोग की है और वर्षों से हड्डारोड़ी के रूप में ही प्रयुक्त होती आई है।

आरोप है कि वर्तमान सरपंच रोहित स्वामी और उनकी पत्नी व ग्राम सचिव शिवानी शर्मा इस आरक्षित भूमि को आबादी भूमि घोषित कर अपने परिवार के नाम करवाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरपंच पक्ष द्वारा इस भूमि पर काश्तकार भी रखा गया है और यहां मृत पशु गिराने पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच परिवार की महिलाएं तथा कुछ अन्य लोग मृत पशु गिराने पर विरोध करते हैं, जिससे गांव में लगातार तनाव बना हुआ है।
ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के वाल्मीकी समुदाय के व्यक्ति द्वारा मृत पशु गिराने पर उसे गाली-गलौच कर जान से मारने की धमकी दी गई। इस व्यवहार को ग्रामीणों ने अमर्यादित और सामाजिक सौहार्द के विपरीत बताया। ग्रामीणों ने मांग की कि आरक्षित भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या नामांतरण न किया जाए और हड्डारोड़ी की भूमि को मूल स्वरूप में ही बहाल रखा जाए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान गांव के वरिष्ठजन और पूर्व जनप्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें पूर्व सरपंच बलवन्द्रि सिंह बराड़, पूर्व सरपंच अशोक जोईया, सुखचौन सिंह, स्वर्ण सुथार, विक्रम शेखावत, प्रदीप यादव, शिव राठी, महेन्द्र सिंह, विजेन्द्र जिनागल, वीरेन्द्र गांधी, श्योपतराम पंवार सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल थे। सभी ने एकजुट होकर मांग की कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें आरक्षित भूमि की सुरक्षा और मृत पशु निस्तारण व्यवस्था को बाधित न करने की मांग प्रमुख रही।



