चतुर्थ दिवस: नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की… सिरसा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब!
ऐलनाबाद,31 दिसंबर (रमेश भार्गव )
सिरसा (रानियां रोड): वीर महाराणा प्रताप नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भक्ति, उल्लास और संस्कारों की एक नई त्रिवेणी बही। जहाँ एक ओर नंदोत्सव की धूम रही, वहीं दूसरी ओर बेटियों को सशक्त बनाने का अभिनव संकल्प लिया गया।
* गायत्री सामाजिक समरसता महायज्ञ:
दिन की पावन शुरुआत
चौथे दिन का शुभारंभ प्रातःकालीन गायत्री सामाजिक समरसता महायज्ञ के साथ हुआ। वैदिक ऋचाओं की आहुतियों ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को दिव्य और ऊर्जावान बना दिया। यज्ञ के माध्यम से समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया गया।
* वीरांगना सम्मान और ‘संस्कार’ की नई पहल
आज का दिन बस्ती की बेटियों के लिए ऐतिहासिक रहा। वीरांगना बालिका सीमा ठाकुर को श्रीमद् भगवत गीता भेंट कर सम्मानित किया गया।
बड़ी घोषणा: यज्ञाचार्य दीदी श्रीजी ने घोषणा की कि भविष्य में बस्ती की बालिकाओं को हवन विधि का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महत्व: बालिकाओं को वेद मंत्रों का शुद्ध उच्चारण सिखाया जाएगा, जिससे वे सनातन संस्कृति की ध्वजवाहक बन सकेंगी। यह पहल नारी शक्ति को आध्यात्मिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
* नंदोत्सव की धूम और मुख्य अतिथि का सानिध्य
कथा में जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी ‘नंदोत्सव’ का प्रसंग आया, तो पूरा पांडाल झूम उठा। खिलौने और बधाइयाँ बाँटी गईं।
मुख्य अतिथि: इस पावन अवसर पर श्रीमान जनक राज जी सोनी (H.D. Jewellers) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रभु का आशीर्वाद लिया और इस धार्मिक आयोजन की सराहना की।
* विशेष आकर्षण: गोवर्धन पूजन एवं 56 भोग (आगामी)
आज कथा का मुख्य आकर्षण गोवर्धन पूजन रहेगा। भगवान कृष्ण की सुंदर बाल लीलाओं का वर्णन किया जाएगा और प्रभु को 56 भोग लगाकर भव्य दर्शन कराए जाएंगे।
महत्व: गोवर्धन पूजन हमें प्रकृति की रक्षा और अहंकार के त्याग का संदेश देता है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ भक्त के हृदय में वात्सल्य और प्रेम का संचार करती हैं। दूध-दही की नदियाँ और छप्पन भोग के दर्शन भक्तों के लिए विशेष अनुभव होंगे।
मुख्य बिंदु:
* संस्कृति संरक्षण: बेटियों को वेद और हवन से जोड़ने का संकल्प।
* दिव्य दर्शन: नंदोत्सव में झूमते श्रद्धालु और श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ।
* सामाजिक एकता: महायज्ञ के जरिए समरसता का प्रसार।


