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अभिभावक अपने बच्चों को मोबाइल फोन के सुरक्षित उपयोग करने बारे जागरूक करें:- एसपी

ऐलनाबाद, 18 मार्च (रमेश भार्गव) आधुनिकता के इस युग में सिरसा पुलिस द्वारा आमजन व बच्चों को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए विशेष एडवाजरी जारी करते हुए विशेषकर अभिभावकों को आगाह करते हुए कहा है कि वर्तमान डिजिटल युग में बच्चों को इंटरनेट से पूर्णतः दूर रखना संभव नहीं रह गया है। ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चे अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप पर व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराधियों द्वारा बच्चों को निशाना बनाए जाने के मामलें लगातार बढ़ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। एसपी दीपक सहारण ने बताया कि साइबर अपराधी मोबाइल फोन पर वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों को निशाना बनाकर साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहे है,इसलिए सावधानी एवं सतर्कता बेहद जरुरी है । उन्होंने बताया कि साइबर ठग बच्चों को विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन प्रलोभन देकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। ये ठग कभी गेम्स में फ्री रिवॉर्ड, तो कभी सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर बच्चों से संपर्क करते हैं और धीरे-धीरे उनकी निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। कई मामलों में बच्चे अनजाने में ही अपनी या अपने परिवार की महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे वे साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। एसपी दीपक सहराण ने कहा कि इंटरनेट का गलत उपयोग बच्चों के मानसिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। साइबर बुलिंग, हिंसक या अनुचित कंटेंट के संपर्क में आने से बच्चों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ सकती है। इसलिए अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक करें। एसपी दीपक सहारण ने अभिभावकों को सुझाव देते हुए कहा कि बच्चों के साथ खुलकर संवाद करें और उन्हें इंटरनेट के संभावित खतरों के बारे में सरल भाषा में समझाएं। बच्चों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी जैसे नाम, पता, स्कूल का विवरण या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। इसके अलावा, मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर आने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक, ईमेल या वेबसाइट पर क्लिक करने से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियमित रूप से निगरानी रखनी चाहिए। इसके लिए वे बच्चों की ब्राउज़िंग हिस्ट्री, डाउनलोड किए गए ऐप्स और उपयोग की जाने वाली वेबसाइट्स का समय-समय पर अवलोकन करें। साथ ही, पैरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स का उपयोग कर बच्चों की इंटरनेट एक्सेस को सुरक्षित बनाया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण ने अंत में कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि अभिभावक सतर्क रहें और बच्चों को सही मार्गदर्शन दें, तो साइबर ठगी जैसी घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। पुलिस विभाग भी समय-समय पर सेमिनार व गोष्ठियों के माध्यम से आमजन व बच्चों को जागरूक करने के लिए स्कूल कॉलेज एवं शैक्षणिक संस्थानों में लगातार अभियान चलाए जा रहे है, ताकि समाज को सुरक्षित बनाया जा सके।

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