महंत भरत मुनि जी ने कथा की चढ़ावा राशि शिव नंदीशाला को की समर्पित, सेवा और गौ संरक्षण का दिया प्रेरणादायक संदेश
ऐलनाबाद, 23 जुलाई (रमेश भार्गव)।
आज के समय में जहां धार्मिक आयोजनों में प्राप्त होने वाली चढ़ावा राशि का उपयोग प्रायः आयोजन संबंधी कार्यों या अन्य आवश्यकताओं में किया जाता है, वहीं ऐलनाबाद के पूज्य श्री श्री 108 महंत भरत मुनि जी उदासीन, पंचदेव मंदिर ने सेवा, परोपकार और गौ संरक्षण के प्रति अपनी निष्ठा का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। महंत जी का मानना है कि धार्मिक आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि समाजहित और जनकल्याण के कार्यों को भी बढ़ावा देना है।
महंत भरत मुनि जी ने कुछ वर्ष पूर्व श्री रामलीला ग्राउंड, ऐलनाबाद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित ₹51,000 की चढ़ावा राशि शिव नंदीशाला, ऐलनाबाद के सुचारू संचालन एवं गौसेवा के लिए समर्पित कर दी थी। उनके इस निर्णय की उस समय भी क्षेत्रभर में सराहना हुई थी और अनेक लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया था।
इसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 12 जुलाई से 20 जुलाई 2026 तक श्री राधा माधव महिला मंडल, ऐलनाबाद द्वारा सनातन धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्राप्त ₹21,000 की चढ़ावा राशि भी महंत भरत मुनि जी ने बिना किसी व्यक्तिगत उपयोग के शिव नंदीशाला, ऐलनाबाद को दान स्वरूप भेंट कर दी। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।
शिव नंदीशाला ऐलनाबाद परिवार ने महंत भरत मुनि जी के इस सेवा भाव और समाजहित की सोच के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। संस्था के सदस्यों ने कहा कि महंत जी का यह कार्य केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि समाज को सेवा, दान और परोपकार की भावना से जोड़ने वाला प्रेरणादायक संदेश है। ऐसे कार्यों से धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाजसेवा की नई मिसाल स्थापित होती है।
स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी महंत भरत मुनि जी के इस निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि धार्मिक आयोजनों से प्राप्त सहयोग का एक हिस्सा जनकल्याण और गौ संरक्षण जैसे कार्यों में लगाया जाए तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। महंत जी द्वारा समय-समय पर किए जा रहे ऐसे सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

