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गुरु ही भगवान को पाने का रास्ते बताते हैं – विजय आनंद शास्त्री

नवरतन भारत डोट कॉम
हनुमानगढ़, । गुरु पूर्णिमा के अवसर पर टाउन के सेक्टर नंबर 3 में विजय आनंद शास्त्री (गुरूजी) द्वारा  सैकड़ो शिष्यों को आशीर्वाद दिया गया।
डॉ. चन्द्र शेखर व विवेक शर्मा ने बताया की विजय आनंद शास्त्री गुरूजी द्वारा हर वर्ष की भांति इस बार भी बुधवार को अखंड रामायण का पाठ रखवाया गया तथा गुरुवार को रामायण पाठ का समापन किया गया इस अवसर पर हवन यज्ञ व अटूट भंडारे का आयोजन किया गया।
गुरु पर्व के महत्व को बताते हुए विजय आनंद ने बताया कि कहाकि गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं। इस पर्व पर अपने गुरु के प्रति आस्था को प्रगट की जाती है तथा विधिवत रूप से गुरु पूजन किया जाता है। इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन को चारों वेदों के रचयिता और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले वेद व्यास का जन्म हुआ था। यह पर्व अपने आराध्य गुरु को श्रद्धा अर्पित करने का महापर्व है। शास्त्रों में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा बताया है। गुरु ही हमें सही-गलत का भेद बताते हैं, गुरु ही भगवान को पाने का रास्ते बताते हैं, इसलिए गुरु का हर स्थिति में सम्मान करना चाहिये उन्होंने बताया की हर साल आषाढ़ पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। देवशयनी एकादशी के बाद गुरु पूर्णिमा का पर्व आता है यानी देव शयन के बाद गुरु ही हमें परेशानियों से बचाते हैं। गुरु अपने उपदेशों से शिष्य के अज्ञान को दूर करता है। देवशयनी एकादशी के बाद गुरु पुर्णिमा आने का अर्थ ये है कि देव शयन के बाद गुरु का ही सहारा रहता है। गुरु ही अपने शिष्यों का कल्याण करते हैं। इसलिए गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है। इस अवसर पर गुरु जी ने अपने शिष्यों को नशा नहीं करने व सामाजिक कुरीतियों को त्यागने तथा पौधारोपण करने का आह्वान किया। गुरुजी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है हमें पर्यावरण के महत्व को समझना चाहिए और आगे बढ़कर एक व्यक्ति को एक-एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए ताकि प्रकृति को बचाया जा सके उल्लेखनीय है कि राजकीय सेवा से सेवानिवृत पंडित विजय आनंद जी गुरु जी के नाम से जाने जाते हैं। हनुमानगढ़ जिले में सैकड़ो साधकों  ने उन्हें अपना गुरु बना रखा है गुरु पूर्णिमा के अवसर पर साधकों ने उनके निवास पर पहुंचकर पूजा अर्चना कर दीक्षा प्राप्त की वआशीर्वाद लिया ।

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