ब्रेकिंग न्यूज़

आचार्य भिक्षु जन्मोत्सव व तेरापंथ स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया

-साध्वी श्री सूरजप्रभा के सानिध्य में श्रद्धा, साधना और समर्पण से गुंजा तेरापंथ भवन

नवरतन भारत डोट कॉम:- हनुमानगढ़। तेरापंथ धर्मसंघ के प्रथम आचार्य आचार्य भिक्षु का जन्मोत्सव और 266वां तेरापंथ स्थापना दिवस हनुमानगढ़ स्थित तेरापंथ भवन में भव्य श्रद्धा व साधना भाव से मनाया गया। इस आध्यात्मिक अवसर पर साध्वी श्री सूरजप्रभा जी, साध्वी श्री डॉ. लावण्य यशा जी व साध्वी श्री नैतिक प्रभा जी के पावन सानिध्य में विविध कार्यक्रम आयोजित हुए।
साध्वी श्री सूरजप्रभा जी ने अपने प्रवचन में आचार्य भिक्षु के क्रांतिकारी व्यक्तित्व और मर्यादित जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे एक ऐसे संत थे जिन्होंने तेरापंथ धर्मसंघ की नींव दृढ़ मर्यादाओं पर रखी। उन्होंने बताया कि तेरापंथ धर्मसंघ की विशेषता यह है कि यह एक आचार्य की आज्ञा पर आधारित और अनुशासित धर्मसंघ है, जो आज भी उन्हीं सिद्धांतों पर दृढ़ है।
इस पावन अवसर पर सायंकालीन धम्म जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें टमकौर से आईं संगायिका सुश्री दीक्षा चोरडिया ने मधुर भजनों के माध्यम से आचार्य भिक्षु की जीवनगाथा को स्वरबद्ध कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। करिश्मा बोथरा, अल्का दुग्गड़, मेघा बांठिया, महेश भादानी, मनोज राखेचा सहित अन्य कलाकारों ने भी गीतिका प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा अध्यक्ष संजय बांठिया, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, डॉ. पारस जैन, डॉ. विक्रम जैन, संजीव बांठिया, डॉ. नरेश सकलेचा, राजेन्द्र बैद, लोकेश बैद, सुरेन्द्र बोथरा, अनुराग बांठिया, महिला मंडल अध्यक्ष संतोष बांठिया, डॉ. दीपिका, युवक परिषद अध्यक्षा मुदिता बांठिया, मंत्री रोहित दुग्गड़, गौरव बैद, अभिषेक दुग्गड़, कमल बांठिया, जियेश बांठिया, मुदित बोथरा, पारस राखेचा, जैन प्रकाश जैन, अणुव्रत समिति अध्यक्ष हरीश दफतरी, मधु दफतरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
तेरापंथ स्थापना दिवस व गुरु पूर्णिमा समारोह के तहत हुए आयोजन में गुरुदेव आचार्य भिक्षु के प्रति भावांजलि अर्पित की गई। साध्वी श्री नैतिक प्रभा जी ने तेरापंथ इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि आचार्य भिक्षु को प्रारंभिक समय में स्थान नहीं मिलने पर श्मशान भूमि में रात्रि बितानी पड़ी तथा केलवा चातुर्मास के समय उन्होंने गुफा जैसी आंधरी औरी में चातुर्मास कर कठोर तप व साधना की।
साध्वी डॉ. लावण्य यशा जी ने बताया कि किस प्रकार आचार्य भिक्षु ने भगवान महावीर के सिद्धांतों पर चलते हुए शुद्ध साधु धर्म की मर्यादा में रहकर धर्मसंघ को आगे बढ़ाया और मर्यादित जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया।
गुरुदेव के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करते हुए जैन प्रकाश जैन, संजय बांठिया, रोहित दुग्गड़, अभिषेक दुग्गड़, सुरेन्द्र कोठारी ने भी अपने विचार रखे। मंच संचालन मनोज राखेचा ने किया।
पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, समर्पण और साधना का अद्वितीय संगम देखने को मिला, जिसने सभी श्रद्धालुओं को आचार्य भिक्षु की तपस्वी परंपरा और तेरापंथ धर्मसंघ की महान विरासत से भावविभोर कर दिया।

Navratan Bharat

Related Articles

Back to top button