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भाखड़ा नहर में 1200 क्यूसेक पानी की मांग को लेकर किसानों का महापड़ाव
- हनुमानगढ़। भाखड़ा नहर में 1200 क्यूसेक पानी की मांग को लेकर भाखड़ा क्षेत्र के किसानों ने मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव डाला। महापड़ाव में हजारों किसान गोलूवाला, पीलीबंगा, सादुलशहर, संगरिया, चिश्तिया, केंचिया, और मटीली जैसे क्षेत्रों से एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे। किसानों का कहना है कि उनकी फसलें पानी के अभाव में बर्बाद हो रही हैं और सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
महापड़ाव के दौरान वक्ताओं ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हर बार किसानों को पानी के लिए आंदोलन करना पड़ता है और जब तक आंदोलन तेज नहीं होता, तब तक प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता। वक्ताओं ने सरकार पर किसानों को उजाड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह रवैया अस्वीकार्य है।
वक्ताओं ने कहा कि किसानों की फसलें पानी के बिना बर्बाद हो रही हैं और सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति उदासीन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो उनका आंदोलन और तेज होगा।
वक्ताओं ने कहा कि किसानों और आम जनता ने पहले ही लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ सरकार को उसकी जनविरोधी नीतियों का जवाब दे दिया है। अब ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार किसानों के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रही है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ का किसान अब जागरूक और एकजुट है। वे डरने वाले नहीं हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई में किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
महापड़ाव के दौरान किसानों के प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के बीच वार्ता का पहला दौर विफल रहा। किसानों ने प्रशासन पर उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। समाचार लिखे जाने तक दूसरे दौर की वार्ता विफल रहा । किसानों ने कहा कि वे पानी की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं, और बिना 1200 क्यूसेक पानी की आपूर्ति के महापड़ाव समाप्त नहीं करेंगे।
इस मौके पर बीकेयू श्रीगंगानगर जिलाध्यक्ष संदीप सिंह, हनुमानगढ़ जिलाध्यक्ष रेशम सिंह मानुका, विधायक अभिमन्यु पूनिया, जगमीत सिंह, बाबू सिंह, राजवीर ढिल्लो, जगतार सिंह, कश्मीर सिंह, पाला राम, राज मान, और प्रह्लाद नोजल ने भी किसानों को संबोधित किया। नेताओं ने किसानों को एकजुट रहने और संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों के इस आंदोलन से सरकार को उनके हक की आवाज सुननी ही पड़ेगी।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि सरकार और प्रशासन का यह रवैया किसानों के प्रति अन्यायपूर्ण है और इसे सहन नहीं किया जाएगा। किसानों ने यह भी कहा कि पानी उनके जीवन का आधार है और इसे लेकर वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करेंगे।
भाखड़ा नहर क्षेत्र में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। किसानों का कहना है कि नहरों में पानी का वितरण सही ढंग से नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी फसलें सूख रही हैं। सरकार और प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने में विफल रहे हैं।
महापड़ाव में विभिन्न गांवों और क्षेत्रों के किसानों की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसान इस बार अपने अधिकारों को लेकर गंभीर हैं। हजारों किसानों की मौजूदगी ने प्रशासन और सरकार पर दबाव बना दिया है।



