राजनीति

अखिल भारतीय किसान सभा की प्रेस कॉन्फ्रेंस-

Okफसल बीमा, सिंचाई, बिजली व पेयजल संकट को लेकर 21 सूत्रीय मांगों पर आंदोलन का ऐलान

हनुमानगढ़। अखिल भारतीय किसान सभा जिला कमेटी हनुमानगढ़ की ओर से सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों की गंभीर समस्याओं और आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को किसान सभा के जिला महासचिव मंगेज चौधरी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में किसानों की हालत बेहद बदतर हो चुकी है, लेकिन सरकार और प्रशासन किसानों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं।

मंगेज चौधरी ने आरोप लगाया कि जिले में फसल बीमा योजना पूरी तरह से विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं को किसानों के लिए संजीवनी बताया गया था, उन्हीं योजनाओं के तहत पिछले दो वर्षों में किसानों को एक रुपया तक का बीमा क्लेम नहीं मिला। खरीफ 2023 की फसलों पर आज भी ऑब्जेक्शन लगे हुए हैं, जिससे हजारों किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले की नहरों में पानी की स्थिति भी बेहद खराब है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

किसान सभा के जिला महासचिव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिले का कोई भी जनप्रतिनिधि किसानों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। सरकार केवल खोखले भाषण दे रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जिले में भाजपा का सूपड़ा साफ हो चुका है और किसानों के मुद्दों को लेकर कोई सुनने वाला नहीं है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा भी साझा की गई। मंगेज चौधरी ने बताया कि किसानों की जमीन की नीलामी के विरोध में 19 जनवरी को प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 2 फरवरी को पल्लू में बकाया फसल बीमा और स्थानीय समस्याओं को लेकर आंदोलन होगा। वहीं 15 फरवरी को नोहर में प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। सभी तहसीलों में चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित करते हुए फरवरी माह के अंत तक जिला मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूरे जिले में मूंग की फसल पूरी तरह खराब हो गई, लेकिन किसानों को किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया। जिला कलेक्टर ने इस ओर ध्यान तक नहीं दिया। किसान सभा ने आरोप लगाया कि कलेक्टर के आंकड़ों में खराबा हुआ ही नहीं दिखाया गया है। कलेक्टर को जगाने के लिए किसान सभा हर सातवें दिन प्रदर्शन करेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में 21 सूत्रीय मांग पत्र भी प्रस्तुत किया गया। इनमें रबी 2020-21 से लेकर 2024-25 तक के बकाया फसल बीमा क्लेम जारी करने, रिजेक्ट पॉलिसियों को बहाल करने, डेथ क्लेम देने, खरीफ 2023 के ऑब्जेक्शन हटाने, पेयजल व्यवस्था सुधारने, जल-जीवन मिशन में कथित घोटालों की जांच, सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने, कृषि कनेक्शन की अवधि बढ़ाने, नहरों में पूरा पानी देने, ढाणियों के विद्युत कनेक्शन शुरू करने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने तथा मनरेगा में विजिरामजी बिल को निरस्त करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

किसान सभा ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते किसानों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष गोपाल बिश्नोई, तहसील सचिव मोहन लोहरा, चरणप्रीत बराड, केशव पंचारिया, वेद मक्कासर, अनिल चौधरी, रामनिवास भादू सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधि

त किया।

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