. हनुमानगढ़। राजस्थान सरकार के ष्मरू उड़ानष् कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को नगर परिषद सामुदायिक भवन में किया गया। यह कार्यक्रम महिला अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न योजनाओं और पोषण से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरूवात कमलजीत द्वारा किया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक महिला अधिकारिता परवेश सोलंकी, पीएसएसके केंद्र प्रबंधक, कृषि वैज्ञानिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पीएसएसके केंद्र प्रबंधक द्वारा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देने से हुई। उन्होंने महिलाओं और किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार से ये योजनाएं आमजन के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। इसके पश्चात सहायक निदेशक परवेश सोलंकी ने मिलेट कुकीज प्रशिक्षण कार्यशाला के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिलेट यानी मोटे अनाज से बनी कुकीज न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं बल्कि इनके व्यवसायिक उत्पादन से महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का भी अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में संगरिया कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार ने मिलेट कुकीज के पोषण मूल्य और उनके स्वास्थ्य लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिलेट कुकीज को सुपर फूड माना जाता है क्योंकि ये पोषण से भरपूर होती हैं और आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ आहार का बेहतरीन विकल्प हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन कुकीज में प्रोटीन, फाइबर और खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष झाझड़िया ने बाजरे की गुणवत्ता और उससे बनने वाली विभिन्न रेसिपियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाजरे से कई प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं बल्कि बाजार में भी इनकी अच्छी मांग रहती है। इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किसानों को मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों के बारे में जागरूक करना और उन्हें इसके व्यवसायिक पहलुओं से जोड़ना था। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और युवाओं ने मिलेट कुकीज बनाने की विधि और उसके विपणन से संबंधित सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान दिया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को मिलेट कुकीज बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे वे इस कौशल को अपनाकर अपने जीवन स्तर को सुधार सकें। इस कार्यशाला ने लोगों को पोषण, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के नए अवसरों से अवगत कराया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।



