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यज्ञ से मनुष्य में होता है ईश्वरीय गुणों का समावेश- यायावर,

लाडनूं के आर्य समाज मंदिर में यज्ञ-सत्संग का आयोजन                                                         लाडनूं ()। आर्य समाज मंदिर में आयोजित साप्ताहिक यज्ञ-सत्संग में प्रधान जगदीश यायावर ने यज्ञ-ब्रह्मा के रूप में विशेष यज्ञ सम्पन्न करवाया। इस अवसर पर उन्होंने अपने सम्बोधन में आर्य समाज के दस नियमों का सामुहिक पाठ करवाया तथा यज्ञ की महिमा बताते हुए कहा कि व्यक्ति में ईश्वरीय गुणों के समावेश के लिए यज्ञ का आयोजन किया जाता है। यज्ञ से यज्ञकर्ता में तेज, वीर्य, बल, ओज, न्याय और सहनशीलता की प्राप्ति होती है। ये सभी ईश्वरीय गुण कहे जाते हैं। यज्ञ में यजमान के रूप में उपस्थित डा. राजेन्द्र सिंह आर्य ने यज्ञ को सृष्टि का सबसे श्रेष्ठ कर्म बताया और कहा कि यह व्यक्ति को ईश्वरत्व की ओर ले जाता है। मुनिश्री ओमदास वानप्रस्थी ने ईश्वर की महिमा बताई। भंवरदास ने भजन प्रस्तुत किए।‌ इस अवसर पर मंत्री महावीर स्वामी, कोषाध्यक्ष मेघाराम आर्य, दयानंद आर्य, सुबोधचंद्र आर्य, सुरेन्द्र प्रताप आर्य आदि उपस्थित रहे।

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