हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ बार संघ के अधिवक्ताओं ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पुलिस थाना हनुमानगढ़ जंक्शन में दर्ज एफआईआर संख्या 462/2026 की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में प्रकरण से जुड़े आरोपों को निराधार बताते हुए हस्ताक्षरों की एफएसएल जांच कराने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।
ज्ञापन में बताया कि हेम सिंह जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित न्यू लॉयर्स चैंबर ब्लॉक-बी में अधिवक्ता जोधा सिंह भाटी के कार्यालय में सहायक के रूप में कार्यरत है। उसके अनुसार उसका कार्य केवल कार्यालयी फाइलों का रखरखाव, प्रपत्र भरने तथा कार्यालयीन प्रक्रियाओं में सहयोग करना है। किसी भी दस्तावेज अथवा विवाह प्रमाण पत्र का सत्यापन करने या उस पर हस्ताक्षर करने का उसे कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसे में उसके विरुद्ध फर्जी अथवा जाली हस्ताक्षर करने के लगाए गए आरोप पूरी तरह असत्य एवं दुर्भावनापूर्ण हैं।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि अधिवक्ता रोहित खींची और अधिवक्ता मदनलाल पारीक ने आपसी रंजिश के चलते झूठे आरोप लगाकर प्रकरण दर्ज करवाया है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों पक्षों के बीच पूर्व से विभिन्न न्यायालयों में कई मामले विचाराधीन हैं, जिसके कारण व्यक्तिगत द्वेष की भावना से कार्रवाई की गई है।
प्रार्थी ने पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया कि वह जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है तथा अपने वास्तविक एवं नियमित हस्ताक्षरों के नमूने स्वेच्छा से उपलब्ध कराने को भी तैयार है। उसका कहना है कि यदि संबंधित दस्तावेजों पर कोई विवादित हस्ताक्षर हैं तो वे उसके नहीं हैं और न ही उसने कभी ऐसे हस्ताक्षर किए हैं।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि विवाह प्रमाण पत्रों की संबंधित पत्रावलियों पर किए गए हस्ताक्षरों की एफएसएल से वैज्ञानिक जांच करवाई जाए। साथ ही अधिवक्ता मदनलाल पारीक के विभिन्न न्यायालयों में प्रस्तुत वकालतनामों तथा बैंक अभिलेखों में उपलब्ध हस्ताक्षरों के नमूने लेकर उनका मिलान कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
बार संघ के अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित एफआईआर ऐसे व्यक्ति की ओर से दर्ज करवाई गई है, जिसे इस मामले में प्रत्यक्ष रूप से कोई निजी या सार्वजनिक क्षति नहीं हुई थी। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि थाना हनुमानगढ़ जंक्शन द्वारा कथित रूप से दबाव में आकर मुकदमा दर्ज किया गया, जिसकी स्वतंत्र जांच भी कराई जानी चाहिए।
अंत में अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिल सके। साथ ही यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर पूर्व बार संघ अध्यक्ष जितेन्द्र सारस्वत, पूर्व बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जोधा सिंह भाटी,

