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श्रीमद्भागवत कथा में कपिल मुनि के उपदेशों से आत्मकल्याण का संदेश

श्रीमद्भागवत कथा में कपिल मुनि के उपदेशों से आत्मकल्याण का संदेश

ऐलनाबाद, 15 जुलाई( रमेश भार्गव ) सनातन धर्मशाला ऐलनाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिवस कथा व्यास महंत श्री भरतमुनि उदासीन जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कंध का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए भगवान कपिल के दिव्य उपदेशों का महत्व बताया।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान कपिल ने माता देवहूति को जो ज्ञान प्रदान किया, वह संपूर्ण आध्यात्मिक जीवन का नवनीत है। उन्होंने बताया कि मनुष्य यदि अपने मन को भगवान के चरणों में स्थिर कर ले तो वह संसार के दुखों से मुक्त होकर परम शांति प्राप्त कर सकता है। भगवान ने समस्त प्राणियों में अपने स्वरूप का दर्शन करने तथा सभी से प्रेम, करुणा और समभाव रखने का संदेश दिया। यही सच्ची भक्ति का मार्ग है।
कथा के दौरान द्वितीय स्कंध में वर्णित शुकदेव जी के उपदेशों का स्मरण कराते हुए महाराज श्री ने कहा कि प्रत्येक माता को सुमति के समान संस्कारवान बनना चाहिए, जिससे समाज को प्रतापी, सुसंस्कृत, पराक्रमी एवं भगवत्भक्त संतानों की प्राप्ति हो सके।
महाराज श्री ने राजा पृथु के आदर्श शासन का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा को अपनी प्रजा के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। शासन का उद्देश्य जनता के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाना है।
पंचम स्कंध के प्रसंगों में राजा प्रियव्रत, ऋषभदेव, भरत एवं जड़ भरत के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी उच्च आध्यात्मिक अवस्था प्राप्त की जा सकती है। जड़ भरत के जीवन से वैराग्य, आत्मज्ञान और संसार की नश्वरता का संदेश मिलता है।
षष्ठ स्कंध के अजामिल प्रसंग का उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान का नाम अत्यंत प्रभावशाली है। जीवन में कितना भी पतन क्यों न हो, यदि सच्चे मन से भगवान का स्मरण किया जाए और संतों का सान्निध्य प्राप्त हो, तो मनुष्य का कल्याण निश्चित है।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का संकीर्तन किया तथा महंत श्री भरतमुनि उदासीन जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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