ऐलनाबाद, 19 जुलाई (रमेश भार्गव ) सनातन धर्मशाला में राधा माधव महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास महंत श्री भरतमुनि उदासीन जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व समझाया।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं के माध्यम से मानव जीवन के प्रत्येक पक्ष को प्रकाशित किया है। मनुष्य के जीवन में चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां, संकट और चुनौतियां आएं, उसे उनसे विचलित न होकर धैर्य, धर्म और भगवान पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में विजय प्राप्त करने का मार्ग भगवान के बताए आदर्शों और सद्कर्मों से होकर जाता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसमें धर्म, ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, सदाचार और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश समाहित है। मनुष्य को अपने जीवन में सत्संग, सेवा और नाम-स्मरण को स्थान देना चाहिए।
कथा के दौरान महाराज श्री ने कलियुग में भगवान के नाम-संकीर्तन की महिमा का विशेष वर्णन करते हुए कहा कि इस युग में प्रभु के नाम का स्मरण और संकीर्तन ही जीव के कल्याण का सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है। उन्होंने शास्त्र वचन सुनाया—
“कलौ दोषनिधे राजन् अस्ति ह्येको महान् गुणः।
कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसंगः परं व्रजेत्॥”
अर्थात कलियुग अनेक दोषों से भरा हुआ है, लेकिन इसका एक महान गुण यह है कि भगवान श्रीकृष्ण के नाम का कीर्तन मात्र करने से मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त कर सकता है।

