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प्रवासी श्रमिकों के नोनिहालों में शिक्षा की अलख जगाने में कड़ी मेहनत कर रहे है सीडब्ल्यूसी बैंच मजिस्ट्रेट जितेंद्र गोयल

रावतसर“शिक्षा का मंदिर” योजना का उद्देश्य केवल किताबें बाँटना नहीं, बल्कि बच्चों में सीखने की प्रेरणा जगाना है। समुचित शिक्षा के चलते बालमन के भीतर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रबल बनाया जा सकता है। यह बात सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट जितेंद्र गोयल ने नए सत्र में ईंट भट्टों पर खोले निशुल्क विद्यालय में प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शैक्षिक सामग्री व मिठाई वितरित करते हुए कही। सीडब्ल्यूसी बैंच मजिस्ट्रेट जितेन्द्र गोयल का कार्य समाजसेवा, संवेदना और शिक्षा का संगम बन गया है। गोयल द्वारा प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया अभियान आज समाज में प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है। इस अभियान के तहत शिक्षा से वंचित बच्चों के लिए “शिक्षा का मंदिर” नाम से एक नई पहल की गई है, जो उन नन्हें जीवनों को उजाला देने का काम कर रही है। चाईया के पास स्थित श्री गौतम ईंट उद्योग परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रवासी मजदूरों के बच्चों को निःशुल्क पाठ्य सामग्री — किताबें, कॉपियाँ, पेंसिल, बैग,मिठाई और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज में यदि इच्छा शक्ति हो, तो हर बच्चे तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचाया जा सकता है। इससे मासूम चेहरों पर खुशी और उम्मीद की झिलमिलाहट दिखाई देती हैं। जितेंद्र गोयल ने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो समाज को बदल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के बच्चे अक्सर रोज़गार की परिस्थितियों के चलते विद्यालय से दूर रह जाते हैं, लेकिन अब यह स्थिति बदलनी चाहिए। हर बच्चे को शिक्षा का अवसर मिलना ही चाहिए क्योंकि यही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है। उन्होंने बताया कि रावतसर क्षेत्र के लगभग सभी ईंट भट्टों पर शिक्षा से वंचित बच्चों को जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यदि समाज के सभी लोग एकजुट होकर ऐसे कार्यों में भाग लें, तो कोई भी बच्चा अशिक्षित नहीं रहेगा। कार्यक्रम में युवा नेता संजीव भादू, भट्टा संचालक श्रवण शर्मा, अमित कुमार, विश्वास गोयल ,शिक्षक उस्मान सहित काफी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

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